बिहार

विश्व श्रवण दिवस : हेडफॉन के अधिक इस्तेमाल से युवा भी हो रहे बहरेपन का शिकार

अररिया, रंजीत ठाकुर।  हममें से कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोई बात साफ-साफ सुनने में दिक्कत होती है। लेकिन वे इस पर ध्यान नहीं देते हैं। जब तक उनका ध्यान इस ओर जाता है। तब तक ये बीमारी कई अन्य बीमारियों का कारण बन चुका होता है। इसमें बहरापन के साथ कई तरह के मानसिक बीमारी भी शामिल है। विशेषज्ञों की मानें कम सुनने की शिकायत पर अगर समय पर ध्यान दिया जाये। तो दूसरी अन्य समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।

लोगों को श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 03 मार्च को विश्व श्रवण दिवस का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष विश्व श्रवण दिवस का आयोजन “आइए कान और सुनने की देखभल को सभी के लिये वास्तविकता बनाएं” की थीम पर आयोजित किया जा रहा है। इसे लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता संबंधी कई कार्यक्रम आयेाजित किये जायेंगे। इस क्रम में कानों की सेहत की जांच व उपचार संबंधी इंतजाम भी उपलब्ध कराया जायेगा।

श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी

एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि लोगों को बहरेपन की बढ़ रही समस्या के प्रति जागरूकत करते हुए इसका निवारण व कानों के सही देखभाल संबंधी सही तौर-तरीकों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि देश में 6।5 करोड़ से अधिक लोग हैं। जो या तो कम सुनाई देता है अन्यथा बिल्कुल भी सुनाई नहीं देता है। इतनी बड़ी आबादी के इस समस्या की चपेट में आने के बावजूद इसकी पहचान व इलाज के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है। इस कारण रोग प्रभावित लोगों के समुचित इलाज में देरी होती है। इस कारण लोगों कई तरह के मानसिक बीमारी व अवसाद के शिकार होते हैं।

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आज युवाओं में तेजी से बढ़ रही बहरेपन की समस्या

सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह ने कहा कि शरीर के किसी अन्य अंग की तरह कानों की सेहत भी हमारे लिये बेहद जरूरी है। जिस तेजी से आज समुदाय में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए कानों की सेहत के प्रति विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है। बहरेपन की समस्या आज युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक अधिक आवाज में म्यूजिक सुनना, हेडफॉन का अधिक इस्तेमाल इसकी वजह बन रहा है। बहरापन के मुख्य कारणों में कान से मैल व मवाद का निरंतर बहाव, कान के अंदरूनी भाग में सुखा घाव, अनुवांशिक बहरापन, कान के नजदीक अचानक तेजी ध्वनी सुनाई देना शामिल है। इस तरह का कोई लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के परामर्श पर इलाज कराना जरूरी है।


कानों की सेहत के लिये रखें इन बातों का ध्यान

ईयर फोन के ज्यादा इस्तेमाल से परहेज करें
तेज ध्वनी से अपने कानों को सुरक्षित रखें
ईयर बर्ड से कानों की सफाई से परहेज करें
आपका कान खुद सेल्फ क्लीनिंग करने में सक्षम है
कान में दर्द व संक्रमण के लक्षण दिखने पर तत्काल जांच करायें श्रवण संबंधी तकलीफ होने पर चिकित्सकों की सलाह पर श्रवण यंत्र का इस्तेमाल करें

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