पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) जिले में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ विनय मोहन के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसबा में “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत, समुदाय में डायरिया के प्रति लोगों में जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पीएसआई इंडिया और केन्वयू के सहयोग से संचालित प्रचार वाहनो को हरी झंडी दिखाकर उद्घाटन किया गया। यह प्रचार वाहन जिला के हाई रिस्क प्रखंड सहित शहरी क्षेत्रों का भ्रमण करना और प्रचार वाहनों में बज रहे डायरिया रोको संदेश को प्रचारित करने का काम 31 अगस्त तक करने की शुरुआत की गई है। इस मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कसबा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पूर्णिया, जिला पीएसआई से प्रोग्राम मैनेजर पंकज कुमार राय, एफपीसी अस्मिता कुमारी, डीसी यूनिसेफ शिव शेखर सिंह, बीसीएम कंचन कुमारी, बीएचएम कसबा सहित जिला स्वास्थ समिति और जिला प्रतिरक्षण कार्यालय के कर्मी एवं प्रखंडों से आए अन्य स्वास्थ्य कर्मी आशा/ए एन एम आदि उपस्थित हुए।
बच्चों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में डायरिया जैसी बीमारियों पर सामाजिक जागरूकता के माध्यम से प्रभावी नियंत्रण संभव है : डीआईओ
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (डीआईओ) डॉ विनय मोहन ने कहा कि बच्चों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में डायरिया जैसी बीमारियों पर सामाजिक जागरूकता के माध्यम से प्रभावी नियंत्रण संभव है। इसके लिए डायरिया प्रबंधन एवं रोकथाम के बारे में आवश्यक जानकारी दी जा सकती है। लोगों द्वारा समय पर डायरिया की पहचान होने और स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार कराने से लोग डायरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकते हैं। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को डायरिया प्रबंधन से संबंधित सूचना सामग्री का भी वितरण किया गया जिसे स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराते हुए डायरिया से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
डायरिया के लक्षणों की पहचान, ओआरएस और जिंक के सही उपयोग की दी गई जानकारी :
मीटिंग के दौरान पीएसआई इंडिया के प्रोग्राम मैनेजर पंकज कुमार राय द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों को डायरिया के लक्षणों की पहचान, ओआरएस और जिंक के सही उपयोग, बच्चों में डिहाइड्रेशन की पहचान तथा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि डायरिया जैसी बीमारी से घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि समय पर सही इलाज और सावधानी से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। कार्यक्रम में बताया गया कि साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल का उपयोग, हाथ धोने की आदत और बच्चों को समय पर ओआरएस एवं जिंक देना डायरिया से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं। आशा एवं एएनएम को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को इन उपायों के बारे में जागरूक करें और डायरिया के मामलों में तुरंत आवश्यक उपचार उपलब्ध कराएं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्र में “डायरिया से डर नहीं” अभियान को प्रभावी रूप से लागू करेंगे और समुदाय को स्वस्थ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
