बिहार

शब-ए-बारात पर मौलाना अनीसुर रहमान कासमी के विचार

फुलवारीशरीफ, अजित। ऑल इंडिया मिली काउंसिल के अध्यक्ष हज़रत मौलाना अनीसुर रहमान कासमी ने शब-ए-बारात को क्षमा, दया, पश्चाताप और अल्लाह की ओर लौटने की रात बताया है. उन्होंने कहा कि शाबान की पंद्रहवीं रात अल्लाह की विशेष रहमत का समय है, जिसमें बहुदेववाद और द्वेष से दूर रहने वाले बंदों की मग़फ़िरत की जाती है।

मौलाना कासमी के अनुसार, इस रात का असल संदेश इबादत, दुआ, आपसी दुश्मनी को खत्म करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शब-ए-बारात की फ़ज़ीलत हदीसों से प्रमाणित है, लेकिन इबादत में किसी तरह की अति, दिखावा या मनगढ़ंत तरीकों से बचना चाहिए. नमाज़, कुरान की तिलावत, ज़िक्र और दुआ जैसे आम नफ़्ली अमल इस रात के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कब्रिस्तान जाना या किसी खास तरीके की नमाज़ को ज़रूरी समझना सही नहीं है. शब-ए-बारात का सही लाभ वही उठा सकता है, जो दिल को द्वेष से पाक कर अल्लाह की रहमत की ओर सच्चे दिल से रुख करे।

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