बिहार

जिले में 05 हजार 248 मरीज हैं हाथीपांव फाइलेरिया से ग्रसित, ग्रसित अंगों के नियंत्रण का रखा जा रहा ध्यान

पूर्णिया, (न्यूज क्राइम 24) फाइलेरिया एक संक्रमित रोग है, जिससे ग्रसित होने पर उसका सम्पूर्ण इलाज नहीं किया जा सकता है। क्यूलेक्स मादा मच्छरों द्वारा ग्रसित मरीजों के बाद सामान्य व्यक्ति को काटने से सामान्य लोग फाइलेरिया ग्रसित हो सकते हैं। फाइलेरिया ग्रसित होने का पता लोगों को वर्षों बाद लगता है जब रोग का लक्षण संबंधित व्यक्ति के शरीर में स्पष्ट दिखाई देने लगता है। फाइलेरिया संबंधित व्यक्ति के हाथ,पैर, पुरुषों के हाइड्रोसील या महिलाओं के स्तन में सूजन होने लगता है जो नियंत्रित नहीं रखने पर लगातार बढ़ता रहा है। इस दौरान ग्रसित व्यक्ति के संबंधित अंगों में दर्द ओर लालीपन के साथ बुखार होने लगता है जो समय समय पर बढ़ता रहता है।

पैर में ज्यादा सूजन होने पर उसे हाथीपांव भी लगा जाता है। फाइलेरिया ग्रसित होने पर हाइड्रोसील फाइलेरिया के अलावा किसी अंग का सम्पूर्ण इलाज नहीं किया जा सकता है। समय पर इसकी पहचान करते हुए इसका इलाज करने पर इसे ज्यादा बढ़ने से नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित ग्रसित मरीजों को एमएमडीपी किट्स प्रदान किया जाता है जिसके लगातार उपयोग करने से लोग फाइलेरिया ग्रसित अंग को सूजन बढ़ने से नियंत्रण रख सकते हैं।

जिले में हाथीपांव फाइलेरिया से ग्रसित हैं 05 हजार 248 मरीज :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि वैश्विक स्तर पर फाइलेरिया बीमारी को वर्ष 2030 तक जबकि भारत में वर्ष 2027 तक फाइलेरिया बीमारी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया ग्रसित मरीजों की नियमित देखभाल करने के साथ साथ ग्रसित क्षेत्र के आसपास के लोगों को जागरूक किया जा रहा है जिससे कि लोग फाइलेरिया से सुरक्षित रह सकें। उन्होंने बताया कि पूर्णिया जिले में दिसंबर 2022 तक 04 हजार 978 मरीज हाथीपांव फाइलेरिया से ग्रसित मरीज पाए गए थे जिसके पैर या हाथ सूजन से ग्रसित थे।

वर्ष 2023 के दिसंबर माह तक जिले में फाइलेरिया ग्रसित मरीजों की संख्या 05 हजार 248 हो गई है। इसमें अमौर में 233, बैसा में 84, बायसी में 167, बी.कोठी में 193, बनबनखी में 418, भवानीपुर में 515, डगरुआ में 364, धमदाहा में 317, जलालगढ़ में 361, कसबा में 305, रुपौली में 894, श्रीनगर में 211, पूर्णिया पूर्व (ग्रामीण एवं शहरी) में 455 और के. नगर प्रखंड में 731 मरीज हाथीपांव से ग्रसित पाए गए हैं। सभी ग्रसित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से अंगों को नियंत्रित रखने के लिए एमएमडीपी किट्स प्रदान किया जाता है जिसका उपयोग कर मरीज फाइलेरिया ग्रसित अंग में बढ़ने वाले सूजन को रोक सकते हैं।

जिले में 01 हजार 456 हैं हाइड्रोसील फाइलेरिया से ग्रसित मरीज :

वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित होने पर हाथ-पैर के साथ साथ बहुत से पुरुषों के हाइड्रोसील में भी सूजन बढ़ जाता है। ग्रसित होने पर हाथ या पैर के जैसे ही हाइड्रोसील में भी बायां, दायां या दोनों ओर सूजन होने लगता है। लेकिन हाथ-पैर की तरह हाइड्रोसील से ग्रसित फाइलेरिया लाईलाज नहीं होता है। जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हाइड्रोसील फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का ऑपरेशन के जरिये इलाज हो सकता है।

इसके लिए ग्रसित मरीज को नजदीकी अस्पताल के चिकित्सकों से संपर्क कर अपनी ब्लडप्रेसर, सुजर, हीमोग्लोबिन, हार्टबिट आदि आवश्यक जांच करवानी पड़ती है। सबकुछ ठीक होने पर ग्रसित मरीजों का योग्य चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन हो सकता है। ऑपरेशन के बाद 24 घंटे तक अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में रहने के बाद मरीज घर जा सकते हैं। कुछ दिन घर में आराम करने पर ग्रसित मरीज हाइड्रोसील फाइलेरिया से सुरक्षित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 तक जिले में 01 हजार 456 हाइड्रोसील फाइलेरिया से ग्रसित मरीज पाए गए हैं। इसमें से ऑपरेशन के लिए आए 181 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है और वे फाइलेरिया से स्वस्थ हो गए हैं।

फाइलेरिया मरीजों के सहयोग के लिए चल रहा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप :

भीडीसीओ रवि नंदन सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल हाथीपांव फाइलेरिया ग्रसित मरीजों ग्रसित अंग को नियंत्रित रखने के लिए एमएमडीपी किट्स प्रदान किया जाता है। इसके द्वारा मरीजों को टब, मग, तौलिया, साबुन, रुई बंडल, महलम और लिक्विड दवाई दिया जाता है। इसका नियमित उपयोग करने पर मरीज ग्रसित अंगों को बढ़ने से रोक सकते हैं। फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को नियमित ग्रसित अंगों का ध्यान रखने और जरूरत होने पर अस्पताल से आवश्यक सुविधा लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन प्रखंड- पूर्णिया पूर्व, के.नगर और कसबा में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप चलाया जा रहा है। इसके तहत फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का समुदाय स्तर पर ग्रुप बनाया गया है।

इसकी हर माह बैठक आयोजित कर मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती है और उन्हें ग्रसित अंगों को नियंत्रित रखने के लिए एमएमडीपी किट्स के उपयोग के साथ साथ आवश्यक एक्सरसाइज करने की जानकारी दी जाती है। इसका उपयोग करने से मरीज ग्रसित अंग के सूजन को और नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा मरीजों के माध्यम से आसपास के लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के लिए जागरूक भी किया जाता है। लोगों को फाइलेरिया बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाता है जिसके माध्यम से 02 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों (गर्भवती महिला और गंभीर बीमार लोगों को छोड़कर) को आशा कर्मियों द्वारा घर-घर पहुँचकर दवाई खिलाई जाती है। लगातार पांच साल तक एमडीए कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध दवाइयों का सेवन करने पर लोग फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकते हैं।

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