पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में AISA-RYA के आह्वान पर “बिहार में गूँजेगी Gen-Z की आवाज़” कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बिहार के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र-युवाओं, Gen-Z और Gen-Alpha के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न आंदोलनों से जुड़े साथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितता, पुलिस-प्रशासनिक दमन और छात्र-युवा अधिकारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया गया।
कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र “ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है” में उन छात्र-युवा आवाज़ों को मंच मिला जिन्होंने हाल के आंदोलनों में दमन और संघर्ष का सामना किया है। विशाल, जो पुलिस बर्बरता के शिकार रहे हैं, ने अपने अनुभव साझा किए। पटना विश्वविद्यालय आंदोलन में जेल गई छात्रा सबा आफ़रीन ने छात्र आंदोलनों के दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बात रखी। भव्या, नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की छात्रा ने आंदोलन व महिलाओं के ऑनलाइन हैरेसमेंट पे बात रखी तथा आंदोलन तेज करने की बात कि। नवीन, जहानाबाद NEET पीड़िता के पिता, ने न्याय और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए। भारत भूषण, पारा-मेडिकल आंदोलन के नेता, ने स्वास्थ्य शिक्षा और छात्रों के संघर्ष की स्थिति सामने रखी। नवादा स्कूल की छात्राओं रूपा कुमारी और उन्नति ने स्कूली शिक्षा से जुड़े सवालों को सामने रखा। प्रियतम ने BPSC आंदोलन के अनुभव साझा किए, जबकि सरून ने बिहार दारोगा 1799 से जुड़े छात्रों के सवालों को उठाया।
दूसरे सत्र “आंदोलन की आवाज़” में विश्वविद्यालय, शिक्षा, रोजगार और छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े व्यापक राजनीतिक सवालों पर चर्चा हुई। चिंटू कुमारी, प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय एक्ट 1976 आंदोलन की नेता, ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बात रखी। संदीप सौरभ, विधायक, पालीगंज, ने छात्र-युवाओं के सवालों को विधानसभा और व्यापक राजनीतिक मंचों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने रोजगार और नौजवानों के अधिकारों के सवाल पर आंदोलन को मजबूत करने की बात कही। हबीबा, JPSC आंदोलन की प्रमुख आवाज़, ने झारखंड के छात्र-युवा आंदोलनों के अनुभव साझा किए। वहीं इरफ़ान, जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक, ने देशभर में उभर रहे छात्र-युवा आंदोलनों और उनकी एकजुटता पर बात रखी।
तीसरे और अंतिम सत्र “जो दरिया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जाएँगे” में आंदोलन की व्यापक दिशा और छात्र-युवा संघर्षों के भविष्य पर विचार रखे गए। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जंतर-मंतर आंदोलन की सबसे प्रमुख आवाज़ नेहा ने छात्र आंदोलनों को व्यापक सामाजिक संघर्षों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। नेहा ने 70वीं बीपीएससी रद्द करने, दरोगा एग्जाम में धांधली, बीएसएससी की बहालियों, हर प्रतियोगी एग्जाम में स्टूडेंट ओएमआर कॉपी और कैलेंडर की माँगो को प्रमुखता से उठाया। साथ ही नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 7.5 सीजीपीए की नाजायज़ मांग और सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर बात की। प्राध्यापक एवं व्यंग्यकार डॉ. मेड्यूसा ने अपने वक्तव्य के माध्यम से शिक्षा और समाज से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी तथा सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ उठाने की बात रखी। भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार में शिक्षा, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर उठ रही युवा आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। छात्र-युवा आंदोलन की तरह किसान आंदोलन को भी तेज किया जाएगा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि Gen-Z केवल सोशल मीडिया की पीढ़ी नहीं, बल्कि अपने भविष्य, अपनी शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सवाल पूछने और संघर्ष करने वाली पीढ़ी है। बिहार के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, परीक्षाओं की अनियमितता, रोजगार के संकट और छात्रों की आवाज़ पर बढ़ते दमन के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
