बिहार

लिवर प्रत्यारोपण की ऐतिहासिक उपलब्धि पर IGIMS की चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत से की शिष्टाचार मुलाकात

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार में पहली बार राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से सफलतापूर्वक संपन्न हुए लिवर प्रत्यारोपण की ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद आज IGIMS, पटना की चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत से उनके कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान टीम के सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने पूरी चिकित्सकीय टीम को इस सफल एवं सराहनीय कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। मुलाकात के दौरान बिहार में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाओं के विस्तार तथा इस विशिष्ट एवं जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी अपनाने की संभावनाओं पर विस्तार से विमर्श हुआ। इस दिशा में आवश्यक संसाधनों, चिकित्सकीय विशेषज्ञता एवं संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने पर भी चर्चा की गई।

माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बिहार में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी जरूरतमंद मरीज को जीवनरक्षक उपचार से वंचित न होना पड़े।

उन्होंने कहा कि 16 वर्षीय मोनू कुमार के परिजनों ने गहरे दुःख की घड़ी में अंगदान का जो साहसिक और मानवीय निर्णय लिया, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनके इस महादान से तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला है। यह घटना अंगदान के महत्व और मानवता की सर्वोच्च भावना को प्रदर्शित करती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण की सुविधाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। लिवर प्रत्यारोपण के लिए प्रति मरीज ₹15 लाख की सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव श्री कुमार रवि भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी इस उपलब्धि में योगदान देने वाली चिकित्सकीय टीम के प्रयासों की सराहना की।

उल्लेखनीय है कि IGIMS, पटना में 19 वर्षीय युवती का सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। इसके साथ ही मोनू कुमार के अंगदान से दो अन्य मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिनमें एक का प्रत्यारोपण IGIMS तथा दूसरे का AIIMS, पटना में किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में IGIMS, SOTTO बिहार, NOTTO दिल्ली, ROTTO कोलकाता तथा IGIMS एवं AIIMS, पटना की चिकित्सकीय टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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