बिहार

IGIMS में जटिल इसोफेगस-प्लूरल फिस्टुला का आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल प्रबंधन

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), शेखपुरा में 70 वर्षीय मरीज के जटिल इसोफेगस-प्लूरल फिस्टुला का आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल प्रबंधन किया गया। इस दौरान कवरड इसोफेगियल सेल्फ एक्सपैंडिंग मेटैलिक स्टेंट (SEMS) के साथ विशेष स्टेंट फिक्सेटर का उपयोग किया गया। यह प्रक्रिया 6 नवंबर 2026 को गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुई।

संस्थान के उप निदेशक (प्रशासन) सह प्रवक्ता ने बताया कि पूर्णिया निवासी 70 वर्षीय सदानंद मंडल भोजन नली में मांस की हड्डी फंसने की शिकायत के साथ संस्थान पहुंचे थे। उल्टी के दौरान हड्डी मुंह के रास्ते बाहर निकल गई, लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई। कुछ भी खाने-पीने पर लगातार खांसी आने लगी और सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। छाती के एक्स-रे में मवाद और हवा जमा होने की गंभीर स्थिति, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पायोप्यूमोथोरेक्स कहा जाता है, का पता चला।

डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि मरीज को तत्काल राहत देने और छाती में जमा हवा एवं मवाद निकालने के लिए इंटरकोस्टल चेस्ट ड्रेनेज (ICD) ट्यूब लगाई गई। इसके बाद विस्तृत एंडोस्कोपिक जांच में भोजन नली के निचले हिस्से में लगभग चार सेंटीमीटर लंबा फिस्टुला पाया गया, जिससे काफी मात्रा में मवाद निकल रहा था। जांच से भोजन नली और प्लूरल कैविटी के बीच असामान्य संपर्क की पुष्टि हुई। इसी कारण भोजन या तरल पदार्थ ग्रहण करने पर मरीज को खांसी और सांस लेने में परेशानी हो रही थी।

उन्होंने बताया कि मरीज की कमजोर शारीरिक एवं चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए पारंपरिक बड़ी शल्य चिकित्सा जोखिमपूर्ण थी। ऐसे में आधुनिक इंटरवेंशनल एंडोस्कोपिक तकनीक से उपचार का निर्णय लिया गया। प्रभावित हिस्से में कवरड इसोफेगियल स्टेंट लगाया गया और उसके अपनी जगह से खिसकने की आशंका को रोकने के लिए विशेष स्टेंट फिक्सेटर का उपयोग किया गया। इस तकनीक का उद्देश्य फिस्टुला के खुले मार्ग को ढकना और भोजन एवं तरल पदार्थ को प्लूरल कैविटी में जाने से रोकना है, ताकि प्रभावित हिस्से को ठीक होने का अवसर मिल सके।

संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने इस उपलब्धि पर डॉ. राहुल कुमार और पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से गंभीर एवं जटिल रोगों का उपचार किया जाना संस्थान के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि चिकित्सकीय दक्षता, टीम भावना और मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वहीं, संस्थान के निदेशक डॉ. बिंबे कुमार ने गैस्ट्रो मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव झा, डॉ. रविकांत कुमार, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. भाग्यमणि, डीएम रेजिडेंट चिकित्सकों, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन टीम एवं अन्य सहयोगी कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि IGIMS नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों को अपनाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

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