अररिया, रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड के नवाबगंज पंचायत अंतर्गत फुलकाहा के वार्ड संख्या-08 में नल-जल योजना की स्थिति बदहाल नजर आ रही है। यहां नल-जल टंकी “ए” के सप्लाई पाइप में लगभग एक वर्ष से लीकेज होने के कारण पानी सड़क पर बह रहा है, जबकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण उमेश यादव, बुल्लू यादव, रामदेव यादव सहित अन्य लोगों ने बताया कि पाइप करीब एक साल से टूटा हुआ है। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को फोन के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
रामदेव यादव ने बताया कि पाइप से निकलने वाले पानी में गोबर व अन्य गंदगी मिल जाती है, जिससे वार्ड का कोई भी व्यक्ति इस पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं करता। उन्होंने कहा कि सरकार की करोड़ों की यह योजना यहां पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
वहीं, पीएचडी विभाग के कनीय अभियंता रितेश कुमार ने बताया कि उन्हें इस समस्या की पूर्व में कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब जानकारी मिलने के बाद कल तक पाइप की मरम्मत करवा दी जाएगी।
फुलकाहा वार्ड-08 में नल-जल योजना फेल, सड़क पर बह रहा पानी
नरपतगंज प्रखंड के नवाबगंज पंचायत अंतर्गत फुलकाहा के वार्ड-08 में नल-जल योजना की स्थिति बदहाल नजर आ रही है। यहां नल-जल टंकी “ए” के सप्लाई पाइप में पिछले लगभग एक वर्ष से लीकेज होने के कारण पानी घरों तक पहुंचने के बजाय सड़क पर बह रहा है।
ग्रामीणों—उमेश यादव, बुल्लू यादव, रामदेव यादव समेत अन्य ने आरोप लगाया कि पाइप करीब एक साल से टूटा हुआ है। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को फोन के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीण रामदेव यादव ने बताया कि पाइप से आने वाले पानी में गोबर एवं अन्य गंदगी मिल जाती है, जिसके कारण वार्ड के लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की करोड़ों की यह योजना यहां पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
क्या बोले अधिकारी?
पीएचडी के कनीय अभियंता रितेश कुमार ने बताया कि पाइप टूटने की जानकारी उन्हें पहले नहीं मिली थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब जानकारी मिलने के बाद कल ही मरम्मत कार्य करा दिया जाएगा।
ग्रामीणों में नाराजगी-
सूत्रों के अनुसार, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना विभागीय उदासीनता के कारण कई जगहों पर केवल कागजों तक सीमित रह गई है। फुलकाहा वार्ड-08 की स्थिति भी इसी ओर इशारा कर रही है, जहां लोग आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
