पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) राज्य में बच्चों के बीच अंतर रखने में सब डर्मल इंप्लांट सबसे भरोसेमंद साधन बन कर उभर रहा है। 2023 में शुरू हुए परिवार नियोजन के इस नवीन विकल्प को राज्य के 13 जिलों के 27 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध कराया जा रहा है। माचिस की तीली के आकार के सबडर्मल को इम्प्लांट करने के लिए राज्य में 20 मास्टर ट्रेनर और कुल 288 चिकित्सकों को दक्ष किया गया है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक 2 हजार 6 सौ 69 सबडर्मल को राज्य की महिलाओं ने अपनाया है। सबडर्मल अपनाने वाली महिलाओं में सबसे ज्यादा 22 से 30 वर्ष की उम्र की महिलाएं हैं। राज्य में अगस्त तक लगभग 11,000 महिलाओं को सबडर्मल इंप्लांट लगाया जा चुका है। इंप्लांट के बाद भी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सहयोगी संस्थाओं के द्वारा नियमित फॉलोअप किया जाता है, ताकि किसी तरह की स्वास्थ्य परेशानी में त्वरित उपचार कराया जा सके।
स्पेसिंग का भरोसेमंद साधन बन रहा इंप्लांट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह विधि गोली, कॉपर-टी या अन्य अस्थायी साधनों की तुलना में अधिक सुविधाजनक और दीर्घकालिक है। इसे लगाने के बाद महिलाओं को रोजाना कुछ याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि अब महिलाएं दोबारा इम्प्लांट का चुनाव कर रही हैं।
पटना फुलवारी की रहने वाली 24 वर्षीय ममता (काल्पनिक नाम) ने कहा, “पहले मैं गोली और कॉपर-टी का इस्तेमाल करती थी, लेकिन कुछ दिक्कतें थीं। सबडर्मल इम्प्लांट लगवाने के बाद मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। यह बहुत सुविधाजनक है और मुझे हर महीने कुछ याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।” इसलिए मैंने तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद दुबार इंप्लांट लगाया है। वहीं फतुहा दनियावां की 26 वर्षीय रेखा कुमारी (काल्पनिक नाम) ने बताया, “मेरी पहली संतान के बाद मैं दूसरा बच्चा तीन साल बाद चाहती हूं। सबडर्मल इम्प्लांट ने मेरी योजना को आसान बना दिया। यह पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है। मैंने इसे दोबारा लगाने का फैसला किया है।”
राज्य में इस विधि को और अधिक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें। प्रसव या गर्भपात के बाद भी लगाया जा सकता है इम्प्लांट, गंभीर रोगों में नहीं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबडर्मल इम्प्लांट को अपनाने की दूसरी बड़ी बात यह है कि इसे प्रसव के बाद या गर्भपात के बाद भी लगाया जा सकता है, जिससे महिलाओं को अगले गर्भधारण में पर्याप्त अंतर रखने में मदद मिलती है। हालांकि, यह इम्प्लांट गंभीर बीमारियों से ग्रस्त महिलाओं, हार्मोनल असंतुलन, स्ट्रोक, थ्रोम्बोसिस और ब्रेस्ट कैंसर की मरीजों को नहीं लगाया जाता है। चिकित्सकों के मुताबिक, इम्प्लांट लगाने से पहले महिला की पूरी स्वास्थ्य जांच और परामर्श जरूरी है, ताकि किसी तरह के जोखिम से बचा जा सके।
