बिहार

एम्स पटना में आधुनिक गर्भनिरोधक तकनीकों पर विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम

फुलवारीशरीफ, अजीत। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में शनिवार को आधुनिक गर्भनिरोधक तकनीकों और परिवार नियोजन सेवाओं को लेकर विशेष सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘सबडर्मल सिंगल-रॉड गर्भनिरोधक इम्प्लांट’ रहा. कार्यक्रम को पॉपुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीएसआई) इंडिया और ऑर्गेनॉन का सहयोग प्राप्त हुआ.

कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को गर्भनिरोधक इम्प्लांट की तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी देना, उनकी क्षमता बढ़ाना और महिलाओं तक सुरक्षित एवं प्रभावी गर्भनिरोधक विकल्पों की पहुंच सुनिश्चित करना रहा. सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय तथा अनुभवों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई.

कार्यक्रम में एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, परिवार नियोजन की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सरिता, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मुक्ता अग्रवाल, पीएसआई इंडिया के निदेशक हितेश साहनी और ऑर्गेनॉन की प्रतिनिधि रुचि झा समेत स्वास्थ्य विशेषज्ञ व अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए.

प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने सुरक्षित और प्रभावी परिवार नियोजन सेवाओं की व्यापक उपलब्धता पर जोर देते हुए कहा कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए साक्ष्य आधारित चिकित्सा और चिकित्सकीय उत्कृष्टता जरूरी है.

डॉ. सरिता ने नए गर्भनिरोधक विकल्पों के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के प्रशिक्षण और जनजागरूकता को महत्वपूर्ण बताया. वहीं डॉ. मुक्ता अग्रवाल ने सबडर्मल इम्प्लांट को दीर्घकालिक और प्रतिवर्ती गर्भनिरोधक विकल्प बताते हुए उचित परामर्श और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से सेवा उपलब्ध कराने पर जोर दिया.

पीएसआई इंडिया के निदेशक हितेश साहनी ने सरकारी, निजी और विकास क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करने की जरूरत बतायी. ऑर्गेनॉन की प्रतिनिधि रुचि झा ने चिकित्सकों के प्रशिक्षण और गर्भनिरोधक इम्प्लांट को लेकर व्यावहारिक समझ बढ़ाने पर जोर दिया.

कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सबडर्मल सिंगल-रॉड गर्भनिरोधक इम्प्लांट से संबंधित जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे विकल्प महिलाओं को परिवार नियोजन से जुड़े सूचित निर्णय लेने में मदद करने के साथ गर्भनिरोधक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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