बिहार

फुलवारीशरीफ में श्याम रजक बनाम गोपाल रविदास में कांटे की टक्कर : प्रचार थमने से पहले दोनों खेमों ने झोंकी पूरी ताकत

फुलवारीशरीफ, अजीत यादव। फुलवारीशरीफ विधानसभा क्षेत्र में प्रचार का अंतिम दिन सियासी तापमान को चरम पर ले गया. महागठबंधन समर्थित भाकपा (माले) प्रत्याशी गोपाल रविदास और एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार श्याम रजक के बीच मुकाबला अब पूरी तरह सीधी टक्कर में बदल चुका है. दोनों ही खेमों ने मतदान से पहले अंतिम दिन अपनी-अपनी ताकत सड़कों पर उतार दी, जनसंपर्क, रैली, रोड शो और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से मतदाताओं को साधने का हर प्रयास किया गया।

महागठबंधन की ओर से लालू प्रसाद यादव ने रोड शो कर चुनावी हवा को और तेज कर दिया. मुस्लिम और दलित–पिछड़ा वोट बैंक को साधने के लिए निकाला गया यह रोड शो पूरे इलाके में जबरदस्त चर्चा का विषय बना रहा. लालू प्रसाद ने फुलवारी की गलियों में जनता से अपील करते हुए कहा कि “इस बार बिहार में बदलाव तय है, तेजस्वी के नेतृत्व में सरकार बनेगी. इसके लिए फुलवारी शरीफ से गोपाल रविदास को एक बार फिर से विधानसभा में भारी मतों से जीतवा कर भेजिए।

दूसरी तरफ एनडीए उम्मीदवार और पूर्व मंत्री श्याम रजक मोटरसाइकिल जुलूस, पदयात्रा और घर–घर संपर्क अभियान के साथ मैदान में सक्रिय रहे. उन्होंने “2025 फिर से नीतीश, फिर से विकास” का नारा बुलंद करते हुए पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों और बिहार सरकार की योजनाओं का हवाला देकर जनता से समर्थन मांगा. उन्होंने दावा किया कि “फुलवारी में शिक्षा, सड़क, बिजली, रोजगार और स्वास्थ्य का ढांचा हमने बदला है, जनता विकास देख रही है और इसी भरोसे फिर से मतदान करेगी।

यहां से इस बार बारह उम्मीदवार चुनाव में मौजूद हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला मूल रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच सिमटता दिख रहा है. मतदाताओं के बीच चर्चा है कि इस बार हार–जीत का फासला बेहद कम रहने वाला है और परिणाम चौंका सकता है।

चुनाव के आखिरी दिन दोनों ही पक्षों के कार्यकर्ता, नेता, समर्थक और प्रचार वाहन हर गली–मोहल्ले में दिखे. पोस्टर, झंडे, बैनर, ढोल–नगाड़े, पटाखे, नारे — पूरा इलाका चुनावी रंग में रंगा रहा. सोशल मीडिया पर भी वीडियो, पोस्ट, लाइव संबोधन और समर्थन संदेश लगातार वायरल होते रहे।

महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव द्वारा किए गए वादों — रोजगार, पुरानी बहाली, संविदा समाप्ति, शिक्षा–स्वास्थ्य सुधार — को गोपाल रविदास ने जनता के सामने दोहराया, जबकि श्याम रजक ने नीतीश मॉडल, सुशासन और पिछले 5 वर्षों में हुए विकास कार्यों को केंद्र में रखा। अब फुलवारी शरीफ की जनता मतदान के जरिए फैसला सुनाएगी. क्या जनता “बदलाव” के नारे के साथ महागठबंधन को चुनेगी या “विकास जारी रहेगा” के दावे के साथ एनडीए को एक बार फिर मौका देगी. नतीजे जो भी हों, मुकाबला अब पूरी तरह संतुलित है और राजनीतिक हलकों में चर्चा है — “हार–जीत तो एक की होगी, लेकिन अंतर कितना होगा यही असली सस्पेंस है।

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