बिहार

चार साल बाद भी अधूरी सड़क, विभागीय कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन!

अररिया, रंजीत ठाकुर। सरकारी योजनाओं को समय पर पूरा करने और ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के दावों की जमीनी हकीकत फुलकाहा में कुछ और ही नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत लक्ष्मीपुर, फुलकाहा पक्की सड़क से कटैया प्राथमिक विद्यालय एवं टोला होते हुए वेस्ट नवाबगंज सीमा पथ तक बनने वाली सड़क निर्धारित समय-सीमा से करीब चार साल बाद भी अधूरी है। योजना स्थल पर लगा सरकारी शिलापट्ट निर्माण में हुई देरी की खुद गवाही दे रहा है।

शिलापट्ट के अनुसार, 1.246 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 109.27051 लाख रुपये की प्राक्कलित राशि स्वीकृत की गई थी। योजना की शुरुआत 18 जून 2021 को हुई थी और इसे 17 जून 2022 तक पूरा करना था। संवेदक के रूप में रेखा देवी तथा कार्यकारी एजेंसी के रूप में ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल फारबिसगंज का नाम दर्ज है। इसके अलावा पांच वर्षों के सामान्य अनुरक्षण के लिए 15.22117 लाख रुपये का प्रावधान भी किया गया था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ? आखिर किसकी लापरवाही से सरकारी योजना वर्षों तक अधर में लटकी रही? क्या संवेदक को बार-बार मोहलत मिलती रही और विभागीय निगरानी केवल कागजों तक सीमित रही?

इस संबंध में सहायक कार्यपालक अभियंता, नरपतगंज लक्ष्मण कुमार ने स्वीकार किया कि संवेदक को वर्ष 2021-22 में ही योजना पूरी करनी थी, लेकिन अब तक कार्य पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है तथा दिसंबर 2026 तक सड़क निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।

अब उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की जरूरत-

चार साल की देरी के बाद दिसंबर 2026 तक कार्य पूरा करने का आश्वासन अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण कार्य विभाग के वरीय अधिकारी एवं जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच कराएं। योजना की भौतिक प्रगति, भुगतान की गई राशि, निर्माण की गुणवत्ता, संवेदक की जवाबदेही और विभागीय अधिकारियों की निगरानी की भूमिका की जांच हो। यदि लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि सरकारी धन की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

ग्रामीणों का सवाल साफ है—जब सड़क एक साल में बननी थी तो चार साल क्यों लग गए? अब केवल नई समय-सीमा नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण चाहिए।

Related posts

आठ पुलिसकर्मी निलंबित; रिश्वत लेकर दो लोगों को छोड़ने का आरोप

जन्मजात क्लबफुट की ग्रसित बच्चों को सुरक्षित करने के लिए सदर अस्पताल में शुरू हुआ विशेष ओपीडी

बीआईटी मेसरा पटना में छात्र क्लब ‘ऊर्जा’ का शुभारंभ, वार्षिक पत्रिका ‘स्पार्क’ का विमोचन