पठानकोट, कंवल रंधावा। नशे के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत पुलिस ने निरंतर चिट्टे के आर्थिक नेटवर्क पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पुलिस थाना इंदौरा के अंतर्गत वर्ष 2017 में दर्ज किए गए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68एफ(1) तथा 68ई के तहत चिट्टे से जुड़े एक मामले में 1 करोड़ 1 लाख 55 हजार 718 रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों के संबंध में फ्रीजिंग एवं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। कार्रवाई का उद्देश्य नशे के कारोबार से अर्जित धन से बनाई गई संपत्तियों पर कानूनी शिकंजा कसना है।
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्म चंद वर्मा ने देते हुए बताया कि यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 152/2017 से संबंधित है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गांव छन्नी, तहसील इंदौरा, जिला कांगड़ा निवासी दलवीरो तथा उसके परिवार से संबंधित संपत्तियों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। इनमें 61 लाख 96 हजार 561 रुपये मूल्य की दलवीरो एवं उसके परिवार से संबंधित कोठी, 32 लाख 60 हजार 950 रुपये मूल्य की उसके पुत्र मिथुन उर्फ छप्पर से संबंधित कोठी, फर्नीचर व घरेलू सामग्री तथा 6 लाख 98 हजार 207 रुपये मूल्य की उसकी पुत्री घरो देवी के नाम पंजीकृत कार शामिल है। तीनों संपत्तियों का कुल आकलित मूल्य 1,01,55,718 रुपये है।
दलवीरो को हो चुकी है 10 साल की सजा-
पुलिस के अनुसार मामले में दलवीरो को 1 अप्रैल 2025 को माननीय न्यायालय ने दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दलवीरो से जुड़े 5 तथा उसके पुत्र मिथुन उर्फ छप्पर से जुड़े 14 मामले दर्ज हैं।
राजस्व से लेकर आयकर रिकॉर्ड तक खंगाले-
संपत्तियों की वित्तीय जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न सरकारी अभिलेखों की पड़ताल की। इसमें राजस्व अभिलेख, आयकर संबंधी जानकारी, वाहन पंजीकरण विवरण तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा किए गए संपत्ति मूल्यांकन को शामिल किया गया। जांच के दौरान संपत्तियों के स्वामित्व और उनके मूल्य से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया।
अब चिट्टे के साथ कमाई के स्रोत पर भी नजर-
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्म चंद वर्मा ने बताया कि पुलिस जिला नूरपुर में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को केवल चिट्टे की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। नशे के कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह, बैंक लेनदेन, संपत्ति अर्जित करने के स्रोत, परिवार अथवा सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों तथा नशा तस्करी की आगे-पीछे की कड़ियों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से अर्जित धन से बनाई गई संपत्तियों को कानून की पहुंच से बाहर नहीं माना जा सकता। पुलिस ऐसे मामलों में आर्थिक जांच को मजबूत करते हुए नशे के कारोबार की वित्तीय जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
नशे की कमाई से बनाई संपत्ति पर कसेगा शिकंजा-
पुलिस की इस कार्रवाई को नशा तस्करी के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नशे के कारोबार से कमाए गए धन से यदि कोठी, वाहन या अन्य संपत्ति अर्जित की गई है, तो जांच के दौरान उसके स्रोत की पड़ताल की जाएगी और कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान फ्रीजिंग कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के अधीन है तथा संबंधित व्यक्तियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्म चंद वर्मा ने कहा कि नूरपुर पुलिस का उद्देश्य चिट्टे की तस्करी करने वालों के साथ-साथ उस कारोबार को आर्थिक मजबूती देने वाले नेटवर्क पर भी प्रभावी कार्रवाई करना है।
