फुलवारीशरीफ, अजीत। एलर्जी की बढ़ती समस्या के बीच एम्स पटना में मरीजों के इलाज के लिए जल्द ही एलर्जेन इम्यूनोथेरेपी की सुविधा शुरू की जाएगी. इसको लेकर एम्स पटना के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से मंगलवार को “इम्यूनोथेरेपी इन एलर्जिक डिजीजेज” विषय पर सीएमई का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में एलर्जी की आधुनिक जांच, सही निदान और इम्यूनोथेरेपी की नई उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया. उन्होंने कहा कि एलर्जी से जुड़ी बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए समय पर पहचान, लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक उपचार बेहद जरूरी है. उन्होंने पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की इस पहल की सराहना की।
पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र कुमार राय ने कहा कि एलर्जी के इलाज की पहली सीढ़ी एलर्जी पैदा करने वाले कारण की सही पहचान करना है. सटीक एलर्जी जांच के आधार पर ही मरीज के लिए उपयुक्त उपचार तय किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि एम्स पटना में एलर्जी टेस्टिंग की सुविधा पहले से उपलब्ध है और जल्द ही एलर्जेन इम्यूनोथेरेपी सेवा भी शुरू की जाएगी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पटना के मोदी एलर्जिक क्लिनिक के डॉ. गौतम मोदी ने इम्यूनोथेरेपी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देश में करीब हर तीन में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में एलर्जी से प्रभावित है. ऐसे में एलर्जी को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते इसकी जांच और उपचार कराना जरूरी है।
डॉ. मोदी ने आधुनिक एलर्जी जांच के विभिन्न तरीकों के साथ सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी और सब-लिंगुअल इम्यूनोथेरेपी के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उचित मरीजों में इम्यूनोथेरेपी केवल एलर्जी के लक्षणों को दबाने के बजाय बीमारी के मूल कारण को प्रभावित करने वाली उपचार पद्धति साबित हो सकती है।
एम्स पटना के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सोमेश ठाकुर ने एलर्जी की व्यवस्थित जांच और इम्यूनोथेरेपी की उपयोगिता पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को उपचार की नई तकनीकों और पद्धतियों से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
