पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना वीमेंस कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से न्यूरो एंड बायोफीडबैक सोसाइटी (NABS), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन NABSCON 2026 का समापन 31 अक्टूबर 2026 को हुआ। क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी में एआई-संचालित प्रगति विषय पर आयोजित इस सम्मेलन के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका, नई तकनीकों और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों पर विचार साझा किए।
समापन समारोह की शुरुआत डॉ. आकृति वाष्र्णेय के स्वागत भाषण और सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद NABS के अध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह, सम्मानित अतिथि प्रो. डॉ. राजेश कुमार (विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, IGIMS, पटना) और सम्मेलन की संरक्षक एवं पटना वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. तनीषा ए.सी. ने सभा को संबोधित किया।
मुख्य अतिथि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने उपस्थित लोगों को शुभकामनाएं दीं और बदलते मानसिक स्वास्थ्य परिदृश्य से जुड़ी चुनौतियों एवं चिंताओं पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों का सम्मान किया गया तथा प्रमाणपत्र वितरित किए गए। डॉ. नूपुर सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. फरहत जर्बी ने किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इससे पहले आयोजित प्रथम प्लेनरी सत्र में प्रो. रूमाना एन. सिद्दीकी ने डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य और डॉ. प्रियंका तिवारी ने AI-प्रेरित झूठी यादों के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. शिल्पा चौधरी ने की।
सम्मेलन के दौरान छह समानांतर वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुति सत्रों (9 से 14) में AI, मानसिक स्वास्थ्य, सहनशीलता (Resilience), न्यूरोसाइकोलॉजी और चिकित्सीय हस्तक्षेपों से जुड़े विषयों पर शोध प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों की अध्यक्षता प्रो. रूमाना एन. सिद्दीकी, डॉ. फिरोज अहमद, डॉ. शुभम श्री, डॉ. आकृति वाष्र्णेय, डॉ. नूपुर सिन्हा और डॉ. फरहत जर्बी ने की।
द्वितीय प्लेनरी सत्र में प्रो. ब्रज भूषण, डॉ. रवि शंकर रवि और डॉ. तरुण मिश्रा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने की। वहीं, समानांतर वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुति सत्र 15 और 16 ऑनलाइन आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता डॉ. मुक्ता मृणालिनी, डॉ. मेधा और डॉ. आराधना कुमारी ने की।
तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन क्लिनिकल विशेषज्ञता के साथ आधुनिक एवं बुद्धिमान तकनीकों के समन्वय और अंतर-विषयक सहयोग को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ। सम्मेलन में व्यक्तिगत जरूरतों और मरीज-केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
