पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके शिक्षार्थियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और अधूरी पढ़ाई पूरी करने का अवसर देने के उद्देश्य से जीविका एवं प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की साझेदारी में संचालित सेकेंड चांस कार्यक्रम के तहत बिहार में शिक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी और परीक्षा में शामिल होने के लिए व्यापक सहयोग दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में महिला एवं पुरुष दोनों शिक्षार्थी शामिल हैं। जीविका के मजबूत सामुदायिक नेटवर्क और प्रथम की शैक्षणिक विशेषज्ञता के समन्वय से संचालित इस मॉडल में शिक्षार्थियों को पढ़ाई, अध्ययन सामग्री, परीक्षा की तैयारी और परीक्षा से जुड़ी विभिन्न आवश्यकताओं में लगातार सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
विषयवार उपस्थिति रही उत्साहजनक-
वर्तमान चरण में 1,082 शिक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म भरे गए हैं। परीक्षा के दौरान शिक्षार्थियों की उपस्थिति भी बेहद उत्साहजनक रही। English, Mathematics, Basic Computer, Urdu, Sanskrit, Arabic और Science में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। वहीं Yoga एवं Business Studies में 96.6 प्रतिशत, Hindi में 96.4 प्रतिशत, Painting में 96.2 प्रतिशत, Social Science में 96.1 प्रतिशत तथा Home Science में 96 प्रतिशत उपस्थिति रही।
ICH (Indian Culture and Heritage) विषय की परीक्षा का अपडेट अभी प्राप्त होना बाकी है। इसके बाद सभी विषयों की उपस्थिति का पूर्ण अपडेट उपलब्ध हो सकेगा।
यह उपस्थिति शिक्षार्थियों की परीक्षा के प्रति गंभीरता और कार्यक्रम से जुड़े सभी सदस्यों की लगातार मेहनत को दर्शाती है।
मुश्किल परिस्थितियों में भी नहीं टूटा शिक्षार्थियों का हौसला-
परीक्षा के दौरान कई ऐसी घटनाएं भी सामने आईं, जिन्होंने शिक्षार्थियों के दृढ़ संकल्प को सामने रखा। कई शिक्षार्थियों ने दूरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक चुनौतियों और अन्य कठिन परिस्थितियों के बावजूद परीक्षा में शामिल होकर अपनी पढ़ाई पूरी करने का संकल्प दिखाया। ऐसी ही एक प्रेरणादायक घटना पूर्णिया की शिक्षार्थी चांदनी दीदी से जुड़ी है। सड़क हादसे में घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और परीक्षा में शामिल हुईं। उनका जज़्बा इस बात का उदाहरण है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देती है। इसके अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई शिक्षार्थियों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण था। कार्यक्रम से जुड़े सदस्यों ने लगातार संपर्क बनाए रखा और आवश्यकता के अनुसार यात्रा एवं ठहरने से संबंधित सहयोग उपलब्ध कराया, ताकि कोई भी शिक्षार्थी व्यवस्थागत कठिनाई के कारण परीक्षा से वंचित न रहे।
कदम-कदम पर शिक्षार्थियों के साथ खड़ी रही टीम-
सेकेंड चांस कार्यक्रम के तहत शिक्षार्थियों को केवल परीक्षा में शामिल कराने तक सीमित नहीं रखा गया। परीक्षा की तैयारी से लेकर एडमिट कार्ड उपलब्ध कराने, परीक्षा केंद्र की जानकारी, यात्रा, ठहरने, समय पर केंद्र पहुंचने और परीक्षा के दौरान आवश्यक सहयोग तक टीम लगातार शिक्षार्थियों के संपर्क में रही।
कार्यक्रम से जुड़े सदस्यों के अनुसार, पिछले कई सप्ताह से बड़ी संख्या में लोग पूरी प्रतिबद्धता के साथ शिक्षार्थियों की तैयारी और परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। जीविका के राज्य स्तर से लेकर सामुदायिक कैडर तक, प्रथम की राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर की टीम तथा स्थानीय स्तर पर जुड़े सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयास और निरंतर समन्वय से यह पहल आगे बढ़ रही है।
शिक्षा का दूसरा अवसर, नई उम्मीद की शुरुआत-
सेकेंड चांस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शिक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराना नहीं, बल्कि उनमें यह विश्वास पैदा करना है कि पढ़ाई किसी भी उम्र या परिस्थिति में दोबारा शुरू की जा सकती है। जो शिक्षार्थी कभी परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके, उनके लिए यह कार्यक्रम आगे बढ़ने का एक नया अवसर उपलब्ध करा रहा है। परीक्षा में शिक्षार्थियों की उत्साहजनक भागीदारी यह दिखाती है कि सही अवसर, निरंतर मार्गदर्शन और सामुदायिक सहयोग मिले तो अधूरी शिक्षा को पूरा करने का सपना फिर से साकार किया जा सकता है। जीविका-प्रथम साझेदारी का यह मॉडल शिक्षा के दूसरे अवसर को मजबूत करने के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी, संस्थागत सहयोग और शिक्षार्थियों के आत्मविश्वास की एक मजबूत मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।
