बिहार

घर-घर में मनाई गई देवउठनी एकादशी

अररिया, रंजीत ठाकुर। भरगामा प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को तुलसी विवाह का पर्व देवउठनी एकादशी पूरे उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। गन्ने के मंडप तले शालिग्राम तुलसी की पूजा-अर्चना के साथ पुरे विधि-विधान से विवाह हुआ। इस दौरान लोगों ने अपने घरों के द्वार व पूजा मंडप पर रंगोली की कलाकृति भी बनाई। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु,मां लक्ष्मी और तुलसी की विशेष पूजा का महत्व है। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है,जिसमें तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से विधिपूर्वक किया जाता है। यह विवाह मांगलिक कार्यों के शुभारंभ का प्रतीक भी माना जाता है। इस मौके पर महिलाओं ने उपवास कर संध्या बेला तुलसी वृक्ष की पूजा-अर्चना कर प्रसाद व भोजन ग्रहण किया। इस संबंध में पंडित हरेराम झा ने बताया की हिन्दु धर्म में एकादशी का बड़ा हीं महत्व है।

देवउठनी एकादशी को हरी प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी तुलसी विवाह के रूप में भी जाना जाता है। पुराणों के मुताबिक कार्तिक मास में देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह संपन्न किया जाता है। इस विवाह के बाद हीं सभी शुभ कार्य जैसे विवाह,उपनयन आदि प्रारंभ हो जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु भी इसी दिन चार माह के शयन के बाद उठते हैं। इसलिये इसे देवउठनी के नाम से भी जाना जाता है। देवउठनी एकादशी व तुलसी विवाह के मौके पर भक्तों ने अपने-अपने घरों स्थित तुलसी मंदिर व तुलसी स्थान को भव्य तरीके से सजाया। देर संध्या विधि-विधान से तुलसी विवाह कराया। साथ हीं आतिशबाजी भी की गई। जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। भरगामा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में महिलाओं ने दीये जलाकर सुख सम्रद्धि की कामना की। इस मौके पर कई मंदिरों में विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान भी किया गया। जिससे माहौल पूरी तरह से भक्तिमय देखा गया।

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