बिहार

इस्कॉन में मनाया गया चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा ब्रहमदेव नारायण सिन्हा की जन्म शताब्दी समारोह

पटना, अजित : चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा ब्रहमदेव नारायण सिन्हा की जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन पटना के इस्कॉन मंदिर प्रंगण में किया गया। समारोह में गणमान्य लोगों ने देश और समाज के प्रति उनका समर्पण और उनके द्वारा किए गए कार्य की सराहना की और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। स्व डा. ब्रह्मदेव नारायण सिन्हा छात्र जीवन से ही देश सेवा को समर्पित थे। 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर भारत छोड़ो अभियान में सक्रिय हुए और मुजफ्फरपुर के कटरा थाने को जलाने में सक्रिय भुमिका निभाई। ब्रिटिश साम्राज्य उन्हे गिरफ्तार तो नहीं कर पाइ लेकिन आज के लंगट सिंह कालेज और तत्कालीन ग्रीयर भूमिहार ब्राह्मण कालेज में इनको मिल रहे छात्रवृत्ति को रोक दिया गया।

मेधावी छात्र होने के कारण समाज सेवा के लिये इन्होंने अपनी मेडिकल की पढाई पूरी की और मुजफ्फरपुर जिले के दुर्गम ग्रामीण इलाकों जिसमें पहले सीतामढ़ी, वैशाली और समस्तीपुर भी आता था को अपना कार्य क्षेत्र चुना । सड़कों की कमी के बाबजुद वे साइकिल से गाँव गाँव मरीजों के द्वार पहुंचे और निर्धनों को मुफ्त में दवाईयां भी उपलब्ध कराते थे। कुछ समय पश्चात उन्होंने बिहार सरकार में भी चिकित्सक के रूप में अपना योगदान दिया। 1982 में बिहार सरकार की सेवा से रिटायरमेंट के बाद अपने शेष दो बर्षों में परम पुज्य पशुपति बाबा के राजवंशी नगर अस्थायी आश्रम में लोगों को मुफ्त चिकित्सा सेवा देते रहे।

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इस दौरन पटेलनगर में अपने आवास तथा राजवंशी नगर के झुग्गियों के बच्चों से उनका बड़ा स्नेह रहा। वे रोजाना उन बच्चों में टाफी बांटते थे और बच्चे भी उन्हें टाफी बाले बाबा बोलते थे। उनका संम्पूर्ण जीवन देश और समाज सेवा को समर्पित रहा।स्वंतत्रता संग्राम सेनानी सम्मान योजना पेंशन योजना को उन्होंने ठुकरा दिया था। कहते थे देश सेवा प्रत्येक नागरिक का पहला कर्तव्य है और सेवा के लिए शुल्क उचित नहीं। निर्धन छात्रों को गुप्त रुप से पढाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करते थे जिनमे कुछ तो बिहार सरकार में राजपत्रित कर्मचारी बने।

छात्र जीवन में मेधावी छात्र होने के साथ कुश्ती के अच्छे खिलाड़ी थे। वे अच्छे गायक थे और भजन गाने में उनकी बहुत रुचि थी और सार्वजनिक स्थलों पर वे भजन गाना पसंद करते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि सेवा भाव के बिना जीवन व्यर्थ है, हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए। मानव जीवन किसी किसी का भला करने के लिए ईश्वर ने दिया है किसी का बुरा करने के लिये नहीं।

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