बिहार

पटना महिला महाविद्यालय में मनाया गया एंटी रैगिंग सप्ताह, जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए दिया रैगिंग मुक्त परिसर का संदेश

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) महिला महाविद्यालय (स्वायत्त), पटना विश्वविद्यालय में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक एंटी रैगिंग सप्ताह 2026 मनाया गया। इस दौरान जागरूकता कार्यक्रमों, विभिन्न प्रतियोगिताओं, छात्र गतिविधियों और आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुरक्षित, समावेशी एवं सम्मानपूर्ण महाविद्यालयीन वातावरण का संदेश दिया गया।

सप्ताह की शुरुआत 27 अगस्त को महाविद्यालय के सभी विभागों में एंटी रैगिंग विषय पर आधारित वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को रैगिंग के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और शैक्षणिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही, विद्यार्थियों को रैगिंग मुक्त एवं सहयोगपूर्ण परिसर के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। 29 अगस्त को सभी विभागों की ओर से नारा लेखन, पोस्टर निर्माण, लोगो डिजाइन, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी सहित विभिन्न रचनात्मक एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने गरिमा, सहानुभूति, समानता, मित्रता, कानूनी जागरूकता और पारस्परिक सम्मान जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों द्वारा तैयार पोस्टर एवं नारों को महाविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया।

1 सितंबर को स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एंटी रैगिंग शपथ पत्र (Affidavit) भरने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। सभी विभागों के माध्यम से संचालित इस प्रक्रिया का उद्देश्य नव प्रवेशित विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और रैगिंग की रोकथाम के लिए उपलब्ध संस्थागत व्यवस्थाओं से परिचित कराना था।

एंटी रैगिंग सप्ताह का समापन 2 सितंबर को शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित एंटी रैगिंग संगोष्ठी के साथ हुआ। संगोष्ठी में बी.एड. के विद्यार्थियों ने रैगिंग के मनोवैज्ञानिक, कानूनी और संस्थागत पक्षों पर प्रस्तुतियां दीं। वैष्णवी, सौम्या साक्षी एवं श्रेया दास ने समूह में होने वाले अपमानजनक व्यवहार के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर प्रस्तुति दी। कुमारी वर्षा पुरी एवं सिस्टर ज्योति ने रैगिंग पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। वहीं नूपुर पाठक, अंजलि, आशा सोरेन एवं सागिया जली ने भारत में रैगिंग के विरुद्ध कानूनी प्रतिक्रियाओं के विकास पर अपनी प्रस्तुति दी।
संगोष्ठी के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के एंटी रैगिंग दिशा-निर्देशों, संस्थागत व्यवस्थाओं, शिकायत एवं रिपोर्टिंग प्रणाली के साथ-साथ कानूनी जागरूकता और मानवीय मूल्यों के महत्व पर भी चर्चा की गई।

पूरे सप्ताह आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि रैगिंग को मनोरंजन या परंपरा के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मानवीय गरिमा का सम्मान, सहानुभूति, जिम्मेदार व्यवहार और समय पर शिकायत करना सुरक्षित एवं स्वस्थ महाविद्यालयीन वातावरण के लिए आवश्यक है। एंटी रैगिंग सप्ताह का आयोजन डॉ. सिस्टर एम. तनिशा ए.सी., प्राचार्या, पटना महिला महाविद्यालय के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. प्रभास रंजन, सदस्य सचिव, एंटी रैगिंग समिति ने कार्यक्रम के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी विभागों, शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से महाविद्यालय की सुरक्षित, सम्मानपूर्ण एवं रैगिंग मुक्त परिसर के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।

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