बिहार

कड़ाके की ठंड में बचाव को लेकर एम्स पटना में जन-जागरूकता कार्यक्रम, डॉक्टरों ने शीत लहर से सतर्क रहने की दी सलाह

पटना, अजित। उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और शीत लहर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. गिरते तापमान का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है. इसी को देखते हुए शुक्रवार को एम्स पटना के जनरल मेडिसिन विभाग की ओर से ओपीडी कॉम्प्लेक्स में शीत लहर से बचाव और उसके प्रबंधन को लेकर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निर्देशानुसार आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के नेतृत्व में संपन्न हुआ.

कार्यक्रम की शुरुआत जनरल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष एवं रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) ज्योति प्रकाश के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने शीत लहर के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अत्यधिक ठंड से हाइपोथर्मिया, हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. राजू अग्रवाल ने मरीजों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को आम लोगों तक व्यापक रूप से पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर शीत लहर के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की।

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कार्यक्रम में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) चंद्र मोहन कुमार ने बच्चों में शीत लहर से होने वाली बीमारियों और उनके बचाव के उपायों पर जानकारी दी. वहीं न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय ने ठंड के मौसम में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई. कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अमित राज ने भी आम जनता को ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी.

इसके अलावा जनरल मेडिसिन विभाग के संकाय सदस्य डॉ. अंजनी कुमार, डॉ. नरेंद्र कुमार और डॉ. संजीव कुमार ने भी शीत लहर से संबंधित अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम में रेजिडेंट चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। जन-जागरूकता के उद्देश्य से “शीत लहर के दौरान क्या करें और क्या न करें” विषय पर लगभग 100 पंपलेट मरीजों और उनके परिजनों के बीच वितरित किए गए. एम्स प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोग शीत लहर के खतरे को समझेंगे और अपनी सेहत की बेहतर देखभाल कर सकेंगे।

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