बिहार

जन्मजात क्लबफुट की ग्रसित बच्चों को सुरक्षित करने के लिए सदर अस्पताल में शुरू हुआ विशेष ओपीडी

कटिहार, (न्यूज़ क्राइम 24) जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से सदर अस्पताल में जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर से ग्रसित क्लबफूट बच्चों को सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सदर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जन द्वारा ऑपरेशन की शुरुआत की गई है। सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार क्लबफुट का इलाज जितनी कम उम्र में शुरू हो, नतीजे उतने ही बेहतर होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से एक खास मुहिम शुरू की जा रही है, ताकि नवजात और छोटे बच्चों को दिव्यांगता से बचाया जा सके। अनुष्का फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि 2 साल तक के बच्चों की हड्डियां लचीली होती हैं

जिन्हें बिना किसी जटिल सर्जरी के सिर्फ प्लास्टर के जरिए पूरी तरह सीधा और सामान्य किया जा सकता है। इसके लिए प्रखंड में कार्यरत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम के द्वारा इससे संबंधित बच्चों का रेफर किया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को सदर अस्पताल में क्लब फूड ग्रसित बच्चों का विशेष ऑपरेशन थिएटर का उद्घाटन सिविल सर्जन कटिहार के द्वारा किया गया। इस अवसर पर सदर अस्पताल अधीक्षक और आरबीएसके डीईआईसी मैनेजर डॉ प्रशांत कुमार झा और अनुष्का फाउंडेशन के कर्मी उपस्थित रहे। ‌सदर अस्पताल में शुरू किए गए ऑपरेशन थियेटर से अब 0 से 02 साल तक की आयु वर्ग के बच्चे को प्रत्येक बुधवार को ऑपरेशन विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा चिकित्सकीय सहायता प्रदान किया जाएगा। बुधवार से सदर अस्पताल कटिहार में क्लब फुट से संबंधित बीमारियों का इलाज शुरू कर दिया गया है जिसमें 13 बच्चों का ऑपरेशन हेतु चिन्हित किया और 06 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया है।

प्रत्येक बुधवार को सदर अस्पताल कटिहार में क्लब फुट से संबंधित बच्चों का किया जा रहा है मुफ्त इलाज :

आरबीएसके डीईआईसी मैनेजर डॉ प्रशांत कुमार झा ने कहा कि जिले के मीडिया के माध्यम से अनुरोध है कि इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए और लोगों को बताया जाए कि प्रत्येक बुधवार को सदर अस्पताल कटिहार में इससे संबंधित बच्चों का मुक्त में इलाज किया जा रहा है। इससे जिले के अधिक से अधिक क्लब फुट से ग्रसित बच्चों का ऑपरेशन हो सके और लाभार्थी अपने बच्चों को विकलांग होने से बचा कर स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।

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