पटनासिटी, (न्यूज़ क्राइम 24) आज श्री गुरु गोबिंद सिंह महाविद्यालय में उर्दू विभाग के द्वारा “उर्दू गजल के रंग” पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो. (डॉ) एजाज अली अरशद , पूर्व कुलपति एम एम अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय पटना, मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ) अबू बकर रिजवी कुलसचिव, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और गरिमाई उपस्थिति प्रो. (डॉ) अशोक कुमार, डीन, मानविकी संकाय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना, उपस्थिति रही। इसके अलावा स्नातकोत्तर विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अब्बास एवं वर्तमान विभाग अध्यक्ष प्रो. (डॉ) शाइस्ता अंजुमन नूरी एवं पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से अन्य शिक्षकों की उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो (डॉ) मनोज कुमार ने किया।
कार्यक्रम के शुरुआत राष्ट्रीय गीत जन गण मन के साथ हुई इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन हुआ। आगत अतिथियों का स्वागत अंग-वस्त्र, पुष्प-गुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह देकर किया गया। मंच संचालन करते उमेश कुमार ने कहा कि आज जब हम चारों तरफ शोर, भागदौड़ और सतही बातों से घिरे हैं, तब खुद से और अपने जज़्बात से जुड़ने का अगर कोई सबसे खूबसूरत रास्ता है, तो वो ‘उर्दू ग़ज़ल’ है।” मंच पर आमंत्रित महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो डॉ मनोज कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी के आने से महाविद्यालय में रौनक छा गई है।”उर्दू ग़ज़ल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें महबूब की तारीफ़ करते-करते बात खुदा, कायनात, ज़िंदगी और मौत के फलसफे तक पहुँच जाती है।
मीर तकी मीर से लेकर मिर्ज़ा ग़ालिब तक, और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ से लेकर दुष्यंत कुमार तक — ग़ज़ल ने हर दौर में इन्सान की आवाज़ बुलंद की है। ग़ालिब ने क्या खूब कहा है: ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले…’ ।अगले अगले वक्त के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रो. (डॉ) अबू बकर रिजवी को आमंत्रित किया गया। इन्होंने कहा कि यह उर्दू की मोहब्बत है जो यह सभागार में तिल रखने की भी जगह नहीं है शेरो शायरी दुख को मिटाने की कवायत है। उर्दू गजल अदब की आबरू है जो पूरे दुनिया में बहुत ही अदब के साथ उर्दू गजल गई जाती है। आगे उन्होंने उर्दू गजल के प्रमुख शेरो शायरी करने वाले विभिन्न शायरों के बारे में बताया जिन में हाफिज, राजाराम नारायण, कैफ आजमी, शायर साद अजीमाबादी और राहत इंदौरी के प्रमुख रचनाओं को बताया।
वही मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रो. (डॉ) एजाज अली अरशद ने कहा कि मैं धन्यवाद देता हूं महाविद्यालय के प्रचार है एवं रजिस्टर साहब को जिन्होंने इस महाविद्यालय में उर्दू की महफिल सजाई। उर्दू गजल पूरी दुनिया में गाई जाती है और सुनी जाती है। उन्होंने कहा कि की तारीख बताती है विचारधाराए और तालीम कैसी होगी। हमारे विचार वर्तमान धारों से प्रभाव हमारी अभिव्यक्ति पर प्रभाव डालता है। फिरभी हम इंसान है जिसे 300 साल की तारीख समय में नहीं बांटा जा सकता। महाभारत में कृष्ण और अर्जुन की संवाद में गजल की झलक ही तो मिलती है जिसमें कहा गया तुम में मैं हूं तुम जो हो तुम हो सब में ईश्वर है। इसके अलावा इन्होंने कहा की गजल इससे शुरू होती है और गजल महसूस का एहताराम है। आगे इन्होंने फ़ैज़ अहमद अहमद फराज गालिब का उदाहरण देते हुए कहा कि शेर वही बड़ा हो जिसका मतलब बड़ा हो।
20वीं के के शायरों शायरी में एक शब्द के कई मतलब निकालते हैं जो अलग-अलग आयाम में फिट बैठते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि उर्दू गजल में इश्क और इजाज मिलती है। आज दुनिया के हर कोने में उर्दू गजल पर सेमिनार देखने को मिलते है। डॉ अशोक कुमार ने कहा की ग़ज़ल की शोभा ठीक उसे प्रकार से सूखती है जिस प्रकार से कमल से जल की शोभा होती है और जब कमल और जल एकत्र होते हैं तब सरोवर की शोभा बढ़ाती है। इसके अलावा महाविद्यालय में सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती भी मनाई गई। महाविद्यालय परिवार ने एक साथ नमन किया। NSS एवं NCC के द्वारा एक सद्भावना एकता रैली निकाली गई। इस कार्यक्रम में उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंच संचालन किया इसके अलावा महाविद्यालय के सभी शिक्षक कर्मचारी एवं सभी संकाय के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।
