पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) गर्भवती महिलाओं और मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को अब अस्पताल परिसर में रात्रि विश्राम के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध कराने की नई पहल की गई है। बिहार के सभी 38 जिलों में ‘आशा घर’ स्थापित करने की योजना के तहत कुल 39 स्वास्थ्य संस्थानों को चिह्नित किया गया है। इनमें 14 जिला अस्पताल, एक अनुमंडलीय अस्पताल और 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। कैमूर जिले में आशा घर स्थापित भी किया जा चुका है। कैमूर जिले के अधौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा घर स्थापित हो चुका है। यहां आशा कार्यकर्ता रंजू देवी ने कहा कि कार्यकर्ताओं को प्रसव के लिए महिलाओं के साथ अस्पताल आने पर ठहरने, आराम करने और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलता है। इससे उन्हें प्रसूता की देखभाल और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय करने में सहूलियत होती है।
राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जारी गाईडलाइन के अनुसार आशा घर स्थापित करने और उसकी तस्वीर सहित संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही आशा घर की सुविधाओं और संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित की गई है।
आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा सुरक्षित ठहराव :
आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और जरूरत पड़ने पर उनके साथ स्वास्थ्य संस्थानों में रुकने की जिम्मेदारी निभाती हैं। कई बार प्रसव संबंधी जरूरतों और मरीजों की देखभाल के कारण उन्हें रात में भी अस्पताल में रहना पड़ता है। ऐसे में आशा घर की व्यवस्था उनके लिए सुरक्षित ठहराव उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अस्पताल परिसर में बुनियादी सुविधाएं मिलने से आशा कार्यकर्ताओं को सहूलियत होगी और वे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने की अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभा सकेंगी। कैमूर में आशा घर की स्थापना इस पहल के क्रियान्वयन का उदाहरण है।
महिला वार्ड के निकट होगा छह बिस्तरों वाला आशा घर
एसओपी के अनुसार, आशा घर अस्पताल परिसर में महिला वार्ड के निकट बनाया जाएगा। इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर पहले से उपलब्ध खाली कमरे का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक आशा घर में कम से कम छह बिस्तर होंगे और दो बिस्तरों के बीच कम से कम तीन फीट की दूरी रखनी होगी।
प्रत्येक बिस्तर के साथ दस्तावेज और जरूरी सामान रखने के लिए छोटी अलमारी की व्यवस्था होगी। कमरे में दो पंखे, बेडशीट, तकिये, तकिया कवर, छह कंबल, पर्याप्त ट्यूबलाइट और बल्ब, छह कुर्सियां तथा सर्दियों में उपयोग के लिए हीटर का प्रावधान है। इसके साथ स्नानागार और शौचालय की सुविधा भी अनिवार्य होगी।
जिला अस्पताल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक व्यवस्था :
नामित संस्थानों में अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, रोहतास, सहरसा, समस्तीपुर, शेखपुरा और सुपौल के जिला अस्पताल शामिल हैं। नालंदा जिले के अनुमंडलीय अस्पताल, हिलसा को भी इसके लिए चिह्नित किया गया है। वहीं, 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अरवल के कलेर, बांका के धोरैया, भोजपुर के गड़हनी, बक्सर के ब्रह्मपुर, दरभंगा के सिंहवाड़ा, गया के वजीरगंज, जमुई के झाझा, जहानाबाद के रतनी फरीदपुर, कैमूर के अधौरा, किशनगंज के कोचाधामन, लखीसराय के हलसी, मधेपुरा के बिहारीगंज, मुंगेर के असरगंज, मुजफ्फरपुर के कुढ़नी, नवादा के अकबरपुर, पश्चिम चंपारण के योगापट्टी, पटना के फुलवारीशरीफ, पूर्णिया के बरहरा कोठी, समस्तीपुर के सरायरंजन, सारण के नगरा, शिवहर के पिपराही, सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर, सिवान के रघुनाथपुर और वैशाली के लालगंज शामिल हैं। इस सूची में समस्तीपुर जिले के जिला अस्पताल और सरायरंजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दोनों को शामिल किया गया है। इसी वजह से 38 जिलों के लिए नामित स्वास्थ्य संस्थानों की कुल संख्या 39 है।
पांच सदस्यीय समिति संभालेगी संचालन :
आशा घर के सुचारु संचालन के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति गठित की जाएगी। इसमें तीन आशा फैसिलिटेटर और दो आशा कार्यकर्ता शामिल होंगी। समिति के सदस्यों का चयन आशा फैसिलिटेटरों के समूह द्वारा किया जाएगा। आशा घर के संचालन में अस्पताल प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक की भूमिका निर्धारित की गई है। ये अधिकारी संचालन समिति को आवश्यक सहयोग देंगे। समिति की बैठक प्रत्येक तीन महीने पर होगी और बैठक की कार्यवाही राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के आशा संसाधन केंद्र को उपलब्ध करानी होगी।
रजिस्टर में दर्ज होगा उपयोग का विवरण :
आशा घर का उपयोग आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर ही कर सकेंगी। किसी प्रसूता या मरीज को लेकर स्वास्थ्य संस्थान आने पर आशा कार्यकर्ता यहां ठहर सकेंगी। इसके लिए आशा घर में रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें ठहरने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर का नाम दर्ज किया जाएगा। एसओपी के अनुसार, आशा घर में मरीजों के रिश्तेदारों या आशा कार्यकर्ताओं के अन्य परिजनों को ठहरने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था से आशा घर के उपयोग को निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित किया जा सकेगा।
