बिहार

गौरीचक में बाढ़ का कहर, सड़क टूटी तो थम गया गांवों का संपर्क, तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर गुजर रहे लोग

फुलवारीशरीफ, अजीत। पटना के गौरीचक थाना क्षेत्र में पुनपुन और दरधा नदी के बढ़ते जलस्तर ने ऐसा कहर बरपाया है कि चंडासी गांव के पास सड़क का बड़ा हिस्सा टूटकर बाढ़ के तेज बहाव में बह गया. सड़क टूटने के बाद पानी इतनी तेज रफ्तार से बह रहा है कि इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह खतरनाक हो गया है. नव निर्मित अर्धनारीश्वर मंदिर जाने वाला मुख्य रास्ता भी जलमग्न होकर बंद हो गया है. सड़क संपर्क टूटने से बाकरचक समेत आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है. ग्रामीणों को फतुहा बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए सात से दस किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. पूरे इलाके में बाढ़ के पानी और तेज बहाव को लेकर दहशत का माहौल है।

पानी के दबाव में टूट गई करीब एक साल पुरानी सड़क-

चंडासी में करीब एक वर्ष पहले बनी सड़क पर दरधा और पुनपुन नदी का पानी चढ़ गया. पानी का दबाव बढ़ने के साथ सड़क कई जगह से क्षतिग्रस्त होने लगी और देखते ही देखते उसका बड़ा हिस्सा टूट गया. सड़क टूटने के बाद पानी का बहाव सीधे सड़क के बीच से होने लगा. इससे राहगीरों के लिए रास्ता पूरी तरह असुरक्षित हो गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण बाढ़ के पानी का दबाव पड़ते ही सड़क जवाब दे गई. ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।

मंदिर जाने वाले श्रद्धालु लौटे वापस-

चंडासी में नव निर्मित अर्धनारीश्वर मंदिर जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है. सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के कारण मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे कई श्रद्धालुओं को रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का निर्माण होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी है, लेकिन रास्ते की स्थिति को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।

पुल नीचे, सड़क ऊपर नहीं होने से हर साल बनती है समस्या-

ग्रामीणों के अनुसार, इस स्थान पर बना पुल सड़क से करीब पांच फीट नीचे है. बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही पुल और सड़क पर पानी जमा होने लगता है. इस बार नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी के तेज बहाव के कारण स्थिति और गंभीर हो गई. ग्रामीणों ने पुल की ऊंचाई बढ़ाने और सड़क को भी ऊंचा करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बाढ़ के दौरान रास्ता बंद नहीं हो।

सिंचाई विभाग की बालू की बोरियां भी बह गईं-

सड़क को बचाने और पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के कर्मियों ने बालू से भरी बोरियां लगाईं. हालांकि पानी का बहाव इतना तेज था कि बोरियां भी पानी में बह गईं. इसके बाद पानी का दबाव सड़क पर और बढ़ गया तथा सड़क कई जगह से टूट गई. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो सड़क को इतना नुकसान होने से बचाया जा सकता था।

मौके पर पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों के सवालों का नहीं मिला स्पष्ट जवाब-

सड़क टूटने और बाढ़ की गंभीर स्थिति की सूचना मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त सड़क और पानी के बहाव का जायजा लिया, लेकिन ग्रामीणों के सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. ग्रामीण यह जानना चाहते थे कि सड़क को बचाने के लिए तत्काल क्या व्यवस्था की जाएगी और गांवों का संपर्क कब तक बहाल होगा. मौके का निरीक्षण करने के बाद अधिकारी वापस लौट गए।

पुलिस ने माइक से कराया अलर्ट-

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गौरीचक थाना पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है. पुलिस वाहन से लगातार माइक के जरिए लोगों को पानी के तेज बहाव वाले स्थान पर नहीं जाने की चेतावनी दी जा रही है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे बच्चों को पानी के पास नहीं जाने दें. पुलिस का कहना है कि तेज बहाव में जाना जानलेवा हो सकता है और पानी में बहने से लोगों के साथ-साथ मवेशियों की जान को भी खतरा है।

बच्चे पानी में खेलते दिखे, पुलिस ने रोका-

बुधवार को सड़क पर तेज बहाव के बीच कुछ बच्चे पानी में खेलते और स्नान करते नजर आए. मौके पर पहुंचे ब्रजेश कुमार ने बच्चों को पानी से दूर रहने की समझाइश दी. उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इसलिए बच्चों को किसी भी हालत में पानी के पास नहीं जाने दें. पुलिस की ओर से भी लगातार अभिभावकों को सतर्क किया जा रहा है।

पचरुखिया थाना भी पानी से घिरा-

बाढ़ का असर सिर्फ सड़क और गांवों तक सीमित नहीं है. पचरुखिया थाना भी चारों ओर से पानी से घिर गया है. आसपास के इलाकों में पानी फैलने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है. कई गांवों के रास्तों पर पानी जमा है और कुछ स्थानों पर पानी का बहाव भी तेज है।

सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा-

ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है. पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. नदी का जलस्तर यदि इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और भयावह हो सकती है. ग्रामीणों को आशंका है कि कई अन्य संपर्क मार्ग भी पानी की चपेट में आ सकते हैं।

रात में और बढ़ जाती है दहशत-

दिन में तो ग्रामीण किसी तरह पानी के बहाव और टूटे रास्ते की स्थिति देख पा रहे हैं, लेकिन रात होते ही इलाके में खतरा और बढ़ जाता है. तेज बहाव, जलमग्न सड़क और चारों तरफ फैले पानी के कारण पूरा इलाका भयावह नजर आता है. लोगों को सबसे ज्यादा चिंता बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर है।

ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की-

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है. साथ ही टूट चुकी सड़क की तत्काल मरम्मत, पुल की ऊंचाई बढ़ाने और सड़क को ऊंचा करने की मांग की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में इस इलाके में यही समस्या उत्पन्न होती है. अब केवल अस्थायी रूप से बालू की बोरियां लगाने के बजाय स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

बाढ़ के पानी के तेज बहाव के बीच सड़क का टूटना गौरीचक क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. एक ओर दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर अर्धनारीश्वर मंदिर का रास्ता भी बंद हो गया है. प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त सड़क और पुल का स्थायी समाधान करना है।

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