बिहपुर/खरीक, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहपुर विधानसभा क्षेत्र के काजीकोरैया–राघोपुर तटबंध के कटाव प्रभावित हिस्से का पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों, जल संसाधन विभाग के अभियंताओं एवं संबंधित अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तटबंध की वर्तमान स्थिति और कटाव से उत्पन्न खतरे का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद खरीक प्रखंड कार्यालय में जिलाधिकारी, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों एवं अभियंताओं के साथ तटबंध की सुरक्षा और कटाव नियंत्रण को लेकर तकनीकी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा नदी की बदलती धारा, जलप्रवाह की स्थिति, तटबंध पर पड़ रहे दबाव, कटाव की प्रवृत्ति और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में हो रहे भू-क्षरण पर विस्तृत चर्चा हुई।
मंत्री ने अभियंताओं को निर्देश दिया कि कटाव प्रभावित सभी संवेदनशील स्थलों का ग्राउंड-लेवल असेसमेंट कर आवश्यकता के अनुसार टो-प्रोटेक्शन, रिवर ट्रेनिंग और अन्य बाढ़ संघर्षात्मक उपायों को तत्काल सुदृढ़ किया जाए। साथ ही जलप्रवाह और तटबंध पर पड़ने वाले दबाव की लगातार निगरानी करने तथा विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गंगा की बदलती धारा से उत्पन्न चुनौती से निपटने में तकनीकी विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे के विशेषज्ञों को भी स्थल निरीक्षण के लिए बुलाया जा रहा है। तटबंध के समानांतर स्थित परित्यक्त रेलवे भूमि/लाइन के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्र की सुरक्षा के लिए संभावित समाधान तलाशने पर भी विचार किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि इस संबंध में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर परित्यक्त रेलवे भूमि/लाइन के सुदृढ़ीकरण अथवा बिहार सरकार को हस्तांतरण का अनुरोध किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग तटबंध और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा के लिए किया जा सके। जल संसाधन विभाग के अभियंता एवं विशेषज्ञ मौके पर लगातार सक्रिय हैं और आवश्यक सुरक्षात्मक एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जारी हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बिहपुर की जनता और काजीकोरैया–राघोपुर तटबंध की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों और गंगा के प्रवाह को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन बचाव एवं सुरक्षा कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। तटबंध की तत्काल सुरक्षा के साथ दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।
