पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप जिले में संस्थागत प्रसव की संख्या में इजाफा हुआ है और गर्भवती महिला और नवजात शिशु बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित हो रहे हैं। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंड के साथ साथ समुदाय स्तर पर भी स्वास्थ्य केंद्र का संचालन निष्पादित किया जा रहा है जहाँ लाभार्थियों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा रही है।
सभी 14 प्रखंड के 41 सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव सुविधा :
गर्भवती महिलाओं की जांच और नवजात शिशु के सुरक्षित प्रसव के लिए जिले के सभी प्रखंडों में 41 सरकारी अस्पताल उपलब्ध है जहाँ महिला चिकित्सकों और प्रशिक्षित एएनएम की उपस्थिति में प्रसव सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
इसमें अमौर प्रखंड के 02 अस्पताल में शामिल अमौर रेफरल अस्पताल और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मछट्टा, बैसा प्रखंड के 03 अस्पताल में शामिल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैसा, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिरसी, मैगामा अस्पताल बैसा, बायसी प्रखंड के 03 अस्पताल में शामिल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बायसी, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बैरिया और चतंगी अस्पताल बायसी, बनबनखी प्रखंड के 04 अस्पताल में शामिल उप प्रमंडलीय अस्पताल बनबनखी, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जानकीनगर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरसी, बुधिया अस्पताल बनबनखी, बड़हरा कोठी प्रखंड में 02 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हरा कोठी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डिबरा बाजार, भवानीपुर प्रखंड में 02 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवानीपुर और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अकबरपुर, डगरुआ प्रखंड में 03 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डगरुआ, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इचालो और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कतारेहाट, धमदाहा प्रखंड में 02 अस्पताल उप प्रमंडलीय अस्पताल धमदाहा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डमेली, जलालगढ़ प्रखंड में 02 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालगढ़ जलालगढ़ और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इकम्बा, कसबा प्रखंड में 05 अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसबा, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सबदलपुर, अस्पताल बचगांव, साधुबली खुर्द और बेटौना, कृत्यानंद नगर प्रखंड में 03 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कृत्यानंद नगर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंपानगर और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सतकोडरिया, पूर्णिया पूर्व प्रखंड में 03 अस्पताल राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) पूर्णिया, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपतरा और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महेन्द्रपुर, रूपौली प्रखंड में 04 अस्पताल अनुमंडलीय अस्पताल रूपौली, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहनपुर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवटोलिया और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकापट्टी एवं श्रीनगर प्रखंड में 03 अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुट्टी हसेली और अस्पताल फरियानी शामिल है।
सभी अस्पतालों में प्रशिक्षित चिकित्सक उपस्थित रहते हैं जिसके द्वारा स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य जांच करते हुए आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अस्पताल में गंभीर अवस्था वाले मरीजों को विशेष उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है जिससे कि मरीज समय पर उपचार प्राप्त करते हुए स्वस्थ्य होते हैं।
जिले के 03 अस्पतालों में गंभीर गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन और उपचार सुविधा उपलब्ध :
सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि गंभीर गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच और आपरेशन जिले के 03 अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में सुनिश्चित किया जाता है। इसमें पूर्णिया शहर में जीएमसीएच के साथ साथ अनुमंडलीय अस्पताल धमदाहा और बनबनखी में यह सुविधा उपलब्ध रहती है। सभी अस्पतालों में योग्य चिकित्सक नियमित रूप से उपलब्ध रहते हैं यहां गंभीर महिलाओं की तत्काल ऑपरेशन करते हुए माँ और नवजात शिशुओं को सुरक्षित किया जाता है।
इन सभी अस्पतालों में लाभार्थियों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लड स्टोरेज सुविधा भी उपलब्ध रहती है जिससे कि लाभार्थियों को खून उपलब्ध कराते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षित किया जाता है। इसके साथ साथ जिले के 11 अस्पतालों में महिला चिकित्सकों और एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं की सामान्य प्रसव सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अस्पताल में प्रसव के बाद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा महिला के साथ साथ नवजात शिशु के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए दोनों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जाती है जिससे कि दोनों स्वास्थ्य और सुरक्षित रहते हैं।
18 वर्ष से कम और 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के प्रसव निगरानी विशेषज्ञ चिकित्सकों की देख रेख में रहता है सुरक्षित :
सिविल सर्जन डॉ कनौजिया ने बताया कि 18 वर्ष से कम और 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के प्रसव कराने में जटिल समस्या हो सकती है। अस्पताल में जांच के बाद पाए गए ऐसे गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की क्षेणी में रखते हुए उसकी विशेष जांच और उपचार उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा पिछली गर्भावस्था से संबंधित समस्या, पिछले बच्चे/गर्भ की मृत्यु, बार-बार गर्भपात, पिछली गर्भावस्था में प्री-एक्लेम्पसिया/एक्लेम्पसिया, पिछली बार समय से पहले प्रसव, पिछली बार अधिक रक्तस्राव, पिछली बार सीजेरियन ऑपरेशन, गर्भवती महिलाओं की अधिक या बहुत कम होने वाली प्रसव, बहुत अधिक बच्चों का इतिहास, पहली गर्भावस्था में विशेष जोखिम परिस्थितियाँ होने वाली महिलाओं की समस्या, वर्तमान गर्भावस्था की समस्याएँ, उच्च रक्तचाप/प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह, गंभीर एनीमिया, रक्तस्राव, जुड़वाँ/एकाधिक गर्भावस्था, बच्चे की वृद्धि कम होना, भ्रूण की हलचल कम होना, असामान्य भ्रूण की स्थिति, माँ की पहले से मौजूद बीमारियाँ, हृदय रोग, किडनी रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड रोग, मिर्गी, गंभीर संक्रमण, अन्य गंभीर/पुरानी बीमारियाँ, पोषण संबंधी जोखिम, बहुत कम वजन/कुपोषण, मोटापा, गंभीर एनीमिया, अन्य जोखिम, रक्त समूह संबंधी समस्या, कम एएनसी/गर्भावस्था की नियमित जाँच न होना, गर्भावस्था में ऐसी दवाओं का सेवन जो चिकित्सकीय निगरानी में न हो गर्भवती महिला और होने वाले नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है।
स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों द्वारा नियमित इसकी जांच करते हुए लाभार्थियों को आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है जिससे कि माँ और नवजात शिशु स्वस्थ्य और सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा भारत के प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को ऑब्स्टत्रिक इतिहास, चिकित्सकीय इतिहास और वर्तमान क्लीनिकल कंडीशन के आधार पर हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान करते हुए उनका आवश्यक जांच और उपचार कराने पर जोर दिया गया है जिससे कि माँ और नवजात शिशु बिल्कुल स्वास्थ्य और सुरक्षित रह सके।
