पटना, अजित। उन्नत चिकित्सा शिक्षा और जटिल सर्जरी के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए एम्स पटना में शुक्रवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘अवबोधन 2026’ का शुभारंभ हुआ. पूर्वी भारत में पहली बार आयोजित इस व्यापक हैंड्स-ऑन एंडोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर के ईएनटी सर्जन, न्यूरोसर्जन, स्नातकोत्तर छात्र और युवा चिकित्सक आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. कार्यशाला 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित की जाएगी।
एम्स पटना के ईएनटी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का संचालन एनाटॉमी एवं फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग, एम्स पटना तथा पीएमसीएच के एनाटॉमी विभाग के सहयोग से किया जा रहा है. कार्यक्रम एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंजोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (एओआई) बिहार एवं झारखंड के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है।
स्कल बेस सर्जरी को चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल सर्जिकल विधाओं में माना जाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क, नसों और प्रमुख रक्त वाहिकाओं के अत्यंत निकट स्थित क्षेत्र से जुड़ी होती है. इस कारण सर्जनों को विशेष तकनीकी दक्षता और उन्नत प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है. कार्यशाला का उद्देश्य युवा चिकित्सकों को आधुनिक मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक तकनीकों में प्रशिक्षित करना है, ताकि पिट्यूटरी ट्यूमर, मस्तिष्कमेरु द्रव (सीएसएफ) लीकेज, साइनोनैजल कैंसर सहित अन्य जटिल स्कल बेस रोगों का अधिक सुरक्षित और प्रभावी उपचार किया जा सके।
कार्यक्रम का आयोजन कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में उत्कृष्टता का आधार केवल अत्याधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और दक्ष चिकित्सक होते हैं. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के साथ मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का शैक्षणिक नेतृत्व ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. क्रांति भावना तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार कर रहे हैं. पहले दिन प्रतिभागियों को वैज्ञानिक व्याख्यान, ऑपरेटिव वीडियो सत्र, विशेषज्ञ पैनल चर्चा और थ्री-डी एनाटॉमिकल डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से स्कल बेस की जटिल संरचना और आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी की बारीकियों से अवगत कराया गया. आगामी दो दिनों में प्रतिभागियों को कैडेवर आधारित हैंड्स-ऑन डिसेक्शन और अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला को बिहार काउंसिल ऑफ मेडिकल रजिस्ट्रेशन (बीसीएमआर) की ओर से 12 कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) क्रेडिट प्वाइंट्स प्रदान किए गए हैं, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता और राष्ट्रीय महत्व को दर्शाते हैं।
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, एम्स जोधपुर, एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ, अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नई दिल्ली, गोवा ईएनटी सेंटर तथा एसआरएम प्राइम चेन्नई सहित देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं. साथ ही एम्स पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. विकास चंद्र झा एवं डॉ. सरज कुमार सिंह भी अपनी विशेषज्ञता साझा कर रहे हैं।
कार्यशाला में देशभर से 100 से अधिक ईएनटी सर्जन, न्यूरोसर्जन, स्नातकोत्तर छात्र और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए हैं. उच्चस्तरीय वैज्ञानिक विषय-वस्तु, राष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी और व्यावहारिक प्रशिक्षण के कारण ‘अवबोधन 2026’ पूर्वी भारत में स्कल बेस सर्जरी प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभर रहा है. इससे एम्स पटना को उन्नत सर्जिकल प्रशिक्षण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
