पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) “मृत्यु अंत नहीं, कई जिंदगियों की नई शुरुआत भी बन सकती है।” इसी मानवीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “अंगदान महादान–जीवन संजीवनी अभियान” के अंतर्गत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में मंगलवार को अंगदान जागरूकता व्याख्यान एवं क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स पटना ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. अमरेश कृष्ण, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेफ्रोलॉजी, डॉ. उत्पल आनंद, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तथा डॉ. विपिन चंद्र, एसोसिएट प्रोफेसर, यूरोलॉजी उपस्थित रहे।
एम्स पटना के यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ओपीडी में उपचार के लिए आए मरीजों एवं उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने अंगदान से जुड़े वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने ब्रेन स्टेम डेथ, जीवित एवं मृतक अंगदान की प्रक्रिया, अंग प्रत्यारोपण की वैज्ञानिक एवं कानूनी व्यवस्था तथा अंगदान से जुड़े मिथकों और तथ्यों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि एक मृत अंगदाता हृदय, दोनों किडनी, लिवर, फेफड़े, अग्न्याशय सहित कई अंगों का दान कर आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है जबकि कॉर्निया, त्वचा, हड्डियों सहित विभिन्न ऊतकों के दान से 50 से अधिक लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग दो लाख लोगों को किडनी प्रत्यारोपण, 50 हजार से अधिक लोगों को लिवर प्रत्यारोपण तथा लगभग 10 हजार लोगों को हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है लेकिन उपलब्ध अंगों की संख्या आवश्यकता की तुलना में बेहद कम है। परिणामस्वरूप हजारों मरीज समय पर अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक नागरिक स्वैच्छिक अंगदान का संकल्प लें तो यह अंतर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे स्वयं अंगदान का संकल्प लें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज में भी इस संदेश को पहुंचाकर “अंगदान महादान” अभियान के जनदूत बनें।
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स पटना ने कहा कि, “अंगदान मानवता का सबसे बड़ा उपहार है। हमारे एक संकल्प से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। आइए, हम सभी अंगदान के प्रति जागरूक बनें और समाज में आशा, संवेदना एवं जीवन का संदेश फैलाएं।”
व्याख्यान के उपरांत आयोजित अंगदान क्विज़ प्रतियोगिता में मरीजों एवं उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। एम्स पटना में 27 जुलाई से 3 अगस्त 2026 तक “अंगदान महादान–जीवन संजीवनी अभियान” के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता, जागरूकता व्याख्यान, सामुदायिक जन-जागरूकता कार्यक्रम, परिचर्चा (सेमिनार) तथा 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर मुख्य समारोह सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। एम्स पटना का यह अभियान केवल एक जन-जागरूकता कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में “जीवन के बाद भी जीवन” की भावना को सशक्त बनाने का प्रयास है।
