बिहार

इंटरनेट का स्टार बना गैंगस्टर तौसीफ उर्फ बादशाह, पारस अस्पताल हत्याकांड का निकला मास्टरमाइंड

पटना, अजित। पटना पुलिस की कई टीम एक साथ फुलवारी शरीफ के खलीलपुरा गुलिस्तान मोहल्ला पटना के राजा बाजार पारस के पीछे वाला इलाका समनपुरा दानापुर खगौल बिहटा सहित कई इलाकों में ताबड़तोड़ छापामारी कर रही है. पुलिस टीम सबसे पहले इस हत्याकांड में सबसे आगे रहने वाला तौसीफ राजा उर्फ़ बादशाह को गिरफ्तार करने के लिए रात भर पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां फुलवारी शरीफ और आसपास के इलाके में सायरन बजाते छापामारी करने के लिए दौड़ती भागती रही. पुलिस ने तौसीफ के पिता को भी पूछताछ के लिए उठाया है. वहीं पुलिस अन्य संभावित इलाकों में भी उसके रिश्तेदारों दोस्तों के यहां धमक दे रही है. हेलो की पुलिस टीम को इस मामले में कोई सफलता अब तक नहीं मिली है कोई भी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है परिवार के साथ-साथ उसके परिचित लोग भी उसके ठिकाने के बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं. वही पब्लिक में चर्चा है कि पुलिस घटना के बाद उसकी गिरफ्तार के लिए उसके घर और उसकी अन्य संभावित ठिकारों पर छापामारी कर रही है फुलवारी शरीफ में वह बैठा थोड़ा रहेगा. पुलिस को उसके भागने की दिशा में अन्यत्र इलाकों में पता करके छापामारी करके गिरफ्तार करना चाहिए यहां लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।

पारस एचएमआरआई अस्पताल में कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा उर्फ मंटू की सरेआम गोली मारकर हत्या की गुत्थी अब सुलझने लगी है. इस सनसनीखेज वारदात के पीछे का मास्टरमाइंड निकला है तौसीफ उर्फ बादशाह, जो इंटरनेट मीडिया पर अपने स्टाइल और डर के खेल के लिए मशहूर रहा है।

पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि हत्या की इस साजिश में कुल 13 लोग शामिल थे. इनमें से 6 अपराधियों ने सीधे तौर पर वारदात को अंजाम दिया, जबकि बाकी साजिश में शामिल रहे. सीसीटीवी फुटेज से यह साफ हुआ है कि घटना के वक्त बादशाह खुद सबसे आगे था और उसने पूरी कार्रवाई की अगुवाई की।

वारदात वाले दिन छह अपराधी अस्पताल में पहुंचे थे. एक युवक बैग लेकर बाहर खड़ा रहा, जबकि बाकी पांच सीधे भीतर घुस गए. गोलीबारी के बाद चार अपराधी तेजी से बाहर भागे, लेकिन तौसीफ उर्फ बादशाह सबसे अंत में शांत चाल में निकलता दिखा, जिससे उसके आत्मविश्वास और तैयारी का पता चलता है।

जब पुलिस ने बादशाह गैंग की सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. ये अपराधी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डॉन जैसे स्टाइल में स्टाइलिश कपड़े, जूते और चश्मा पहनकर फोटो पोस्ट करते थे. स्टेटस में डायलॉगबाजी होती थी – “किस्मत भी बादशाह उसी को बनाती है, जो खुद कुछ करने का हुनर रखता है.”

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गैंग के चार मुख्य सदस्यों की पहचान हो चुकी है-

तौसीफ उर्फ बादशाह – गुलिस्तान मोहल्ला, फुलवारी शरीफ निवासी है. जैद – सड़क हादसे के बाद कोमा में गया था, अब जमीन के कारोबार से जुड़ा है. बड़का निशू – समनपुरा, राजाबाजार का रहने वाला है, खुद गोली का शिकार हुआ है और अब भी बिस्तर पर है. छोटका निशू – विग्रापुर निवासी है, प्रेम विवाह के कारण दुश्मन बने, अब जेल में बंद है।

बड़का निशू का घर पारस अस्पताल के पीछे ही है. उसके पिता बड़े कारोबारी थे और मां शिक्षिका हैं. छोटका निशू ने नया टोला में एक मुस्लिम युवती से शादी की थी, जिसके चलते उसकी जान को खतरा हुआ और एक बार उसे जान बचाने के लिए गोली चलानी पड़ी थी।

पुलिस को पारस अस्पताल के पीछे गली में लगे सीसीटीवी कैमरों से कई पुख्ता सुराग मिले हैं. इनमें बादशाह का बड़का निशू के घर आते-जाते दिखना भी शामिल है. वारदात वाले दिन सभी छह अपराधी कैमरे में कैद हो गए थे।

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