पटना, अजित गुरु पूर्णिमा के पूर्व संध्या पर बिहार पशुचिकित्सा महाविद्यालय, पटना में ‘आधुनिक युग मे गुरु और शिष्य की भूमिका’ विषय पर एलोक्यूशन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमे विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ हिस्सा लिया.प्रतियोगिता में अनुष्का प्रिया ने प्रथम, अर्धदीप ने द्वितीय एवं रूपनारायण ने तृतीय स्थान प्राप्त किया.
महाविद्यालय के डीन डॉ जे के प्रसाद ने गुरु के महत्व को बताते कहा की वर्तमान समय में शिक्षक को एक गुरु कि भूमिका में आना पड़ेगा जिससे वो शिष्य के सर्वांगीण विकास में सहायक बन सके.उन्होंने अन्तः ज्ञान और बाह्य ज्ञान पर बोलते हुए कहा की हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति से हम बाह्य ज्ञान या किताबी ज्ञान तो दे सकते है, परन्तु अन्तः ज्ञान होना बहुत आवश्यक है जिससे छात्र नैतिकता, मूल्यों की समझ और उसूलों के पक्के बन सके. उन्होंने आगे कहा की अन्तः ज्ञान के लिए कोई किताब नहीं बल्कि आत्ममंथन की जरुरत है. उन्होंने शिक्षकों से कहा की छात्रों में यह सोच पैदा करें की वो समाज को कितना दे सकते हैं.
कार्यक्रम में उपस्थित निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. ए.के.ठाकुर ने कहा की माँ धरती में उत्पन्न हर जीवों की पहली गुरु होती है, जीवन के पहले कदम की सीख माँ से मिलती है बदले में वे किसी भी चीज़ की इच्छा नहीं होती, इसलिए निस्वार्थ भाव से समाज के उत्थान के लिए शिक्षा का प्रसार होना चाहिए ताकि समाज स्वच्छ, सुरक्षित और संपन्न बन सके.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. विशेष कुमार सक्सेना ने कहा की गुरु की महत्ता पर कुछ भी कहना आसान नहीं है, अज्ञानता का निराकरण कर ज्ञान की पथ पर ले जाने वाले गुरु की महिमा का बखान करना बहुत कठिन है.आज जितने भी महान विभुतियों ने हमारे समाज और देश को अपने ज्ञान से सींच कर राह दिखाया है उन सब के पीछे एक गुरु का समर्पण और अपने शिष्यों को गढ़ने में उनकी मेहनत का प्रतिबिम्ब है.उन्होंने कहा की शिष्यों के साथ गुरुजनों का भावनात्मक लगाव बेहद जरुरी है.
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. संजय भारती ने अपने स्वागत भाषण से किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दुष्यन्त यादव ने किया.कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर डॉ सिउली साहा रॉय ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी. एलोक्यूशन प्रतियोगिता में डॉ.अर्चना, डॉ. ज्ञानदेव सिंह और डॉ. सिद्दीकी निर्णायक की भूमिका में रहें. इस अवसर पर डॉ भावना, डॉ. भूमिका, डॉ. अनील कुमार , डॉ. ए.के. दास सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक, छात्र व् कर्मचारी मौजूद रहें.
