बिहार

एक दिवसीय केला प्रदर्शनी-सह-परिचर्चा कार्यक्रम का उद्घाटन

पटना, अजीत। राज्य के कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल द्वारा आज कृषि भवन, पटना में कृषि विभाग की नई पहल वन मंथ-वन क्रॉप के तहत् पहली बार आयोजित एक दिवसीय केला प्रदर्शनी-सह-परिचर्चा कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया. इस कार्यक्रम में राज्य के 12 जिलों से 120 केला उत्पादक किसानों एवं उद्यमियों द्वारा केला एवं इसके प्रसंस्कृत उत्पाद का प्रदर्शन किया गया.इस प्रदर्शनी में केला के क्षेत्र में चुनौतियों एवं अवसर विषय पर उत्पादकों/उद्यमियों के साथ परिचर्चा का आयोजन भी हुआ.

संजय कुमार अग्रवाल,सचिव, कृषि विभाग ने कहा कि बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था में बागवानी की अहम् भूमिका है, जिसमें बागवानी के क्षेत्र में केला एक प्रमुख फल है. केला के उत्पादन में बिहार एक अग्रणी राज्य है. बिहार राज्य में आम के बाद केला दूसरी सबसे ज्यादा लोकप्रिय फल है.केला फल आमजनों के पोषण सुरक्षा, पारिवारिक आमदनी के स्रोत के साथ व्यापार का एक प्रमुख उत्पाद भी है.उन्होंने बताया की बिहार में विगत् 5 वर्षों में केले के क्षेत्रफल एवं उत्पादन दोनों में बढ़ोत्तरी हुई है. अभी केले का उत्पादन बिहार में लगभग 19 लाख मीट्रिक टन है और इसका क्षेत्रफल लगभग 43 हजार हेक्टेयर है. केले के उत्पादन में बिहार का योगदान पूरे देश में 6 प्रतिशत है. बिहार में केला के उत्पादन बढ़ाने के अभी भी बहुत संभावनाएँ हैं.

उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जायेगी.राज्य में शत्-प्रतिशत केले की खेत की मिट्टी की जाँच कराई जायेगी एवं उसके अनुसार किसानों को सुझाव दिया जायेगा. फसल विविधीकरण में बागवानी फसलों की काफी संभावनाएँ है. उन्होंने प्रत्येक बुधवार एवं वृहस्पतिवार को पौधा संरक्षण के पदाधिकारियों को क्षेत्र में जाकर फसलों में लगे कीट-रोग पर नियंत्रण हेतु सुझाव किसानों को देने हेतु निदेश दिया. अगले वर्ष से जून माह में ही केले के टिश्यू कल्चर पौधे किसानों को उपलब्ध करा दिये जायेंगे, इसके लिए इस वर्ष में योजना की स्वीकृति एवं टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ली जायेगी.

अल्पान, चीनिया एवं मालभोग केले के भी टिश्यूकल्चर उपलब्ध कराये जायेंगे. बिहार में किसानों को केला के उन्नत रोपण सामग्री के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गोरौल (वैशाली) में केला अनुसंधान संस्थान की स्थापना 2017 में की गई.

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इसी संस्थान में टिश्यूकल्चर प्रयोगशाला की भी स्थापना की गई है.उन्होंने कहा कि केला अनुसंधान संस्थान को जी-9 और अल्पान प्रभेद के अलावा किसानों की आवश्यकतानुसार दूसरे प्रभेदों पर भी अनुसंधान करने की जरूरत है. सरकार की तरफ से केला के उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत प्रभेद जी-9 भी किसानों तक पहुँचाया जा रहा है.

सचिव ने आगे बताया कि विगत् 20 वर्षों में हमारे राज्य में केला की उत्पादकता में लगभग 125 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो अभी लगभग 45 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है. हमारे राज्य के 12 जिलों वैशाली, सारण, समस्तीपुर, कटिहार, मधेपुरा, खगरिया, पूर्णियाँ, भागलपुर, गोपालगंज, किशनगंज, पश्चिमी चम्पारण एवं पूर्वी चम्पारण में केला की खेती की जाती है। बिहार के इन जिलों में केले की विभिन्न प्रजातियाँ यथा चीनिया, मालभोग, जी-9, अल्पान, बतीशा, रोबस्टा, दवॉर्फ केवेन्डिश, मुठिया आदि की खेती की जाती है। हमारे राज्य से यू0ए0ई0, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कतर और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में केला का निर्यात किया जाता है.केला के निर्यात में बढ़ोतरी की अभी और संभावनाएँ हैं. सरकार द्वारा केले के उत्पादन, प्रसंस्करण, भण्डारण, लॉजिस्टीक और मार्केटिंग के लिए सहायता प्रदान की जा रही है.

उन्होंने प्रगतिशील किसानों से अपील किया कि अपने साथ अन्य किसानों को भी जोड़ें और किसानों के लिए पाठशाला चलायें, जिसके माध्यम से केला के क्षेत्र विस्तार पर और अधिक काम किया जा सके. श्री अग्रवाल ने कहा कि केला प्रदर्शनी-सह-परिचर्चा का आयोजन बिहार में पहली बार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य में उत्पादित विशिष्ट प्रजाति के साथ क्षेत्रीय खास प्रजाति से लोगों को रूबरू कराना एवं इसके लिए बाजार की सम्भावना को तलाशना है. इस कार्यक्रम के आयोजन से केला उत्पादक कृषकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगा एवं केला के भंडारण, प्रसंस्करण, बाजार आदि से संबंधित नयी-नयी तकनीकी की जानकारी कृषकों तक पहुँचेगा.

इस कार्यक्रम में कृषि निदेशक डॉ॰ आलोक रंजन घोष, निदेशक उद्यान अभिषेक कुमार, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र कुमार, अपर निदेशक (शष्य) धनंजयपति त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक, उद्यान राधा रमण सहित अन्य पदाधिकारी एवं राज्य के केला उत्पादक किसान तथा उद्यमीगण उपस्थित थे.

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