बिहार

नहीं रही विदुषी प्राध्यापिका और कवयित्री डॉ० आरती राजहँस

पटना(अजीत यादव): श्री अरविंद महिला महाविद्यालय में गृह-विज्ञान विभाग की अध्यक्ष रहीं विदुषी प्राध्यापिका और कवयित्री डा आरती राजहँस का, हनुमान नगर, कंकड़बाग स्थित उनके आवास, गत मध्य-रात्रि में निधन हो गया।

डा आरती, सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार स्मृतिशेष डा रवीन्द्र राजहँस की पत्नी थीं। कल प्रातः ९ बजे गुल्बी घाट पर, उनके पार्थिव शरीर का अग्नि-संस्कार संपन्न होगा। उनके ज्येष्ठ सुपुत्र और नागालैंड सरकार में मुख्यसचिव ज्योति कलश मुखाग्नि देंगे। उनके शोक-संतप्त कनिष्ठ पुत्र और भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अमृत कलश, उनकी पुत्री रिमझिम वर्षा समेत सभी परिजन पटना पहुँच चुके हैं।

उनके निधन से साहित्य और प्रबुद्ध-समाज में गहरा शोक व्याप्त है। निधन की सूचना मिलते ही बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ, हिन्दी प्रगति समिति बिहार के अध्यक्ष कवि सत्यनारायण, कवि कमला प्रसाद, साहित्य सम्मेलन की उपाध्यक्ष प्रो मधु वर्मा, सुप्रसिद्ध स्त्री-रोग विशेषज्ञ डा किरण शरण, राकेश सिन्हा आदि साहित्यकारों और प्रबुद्धजन उनके आवास पर पहुँच कर शोकाकुल परिजन को सांत्वना दी।

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कदमकुआं स्थित साहित्य सम्मेलन में एक शोक-गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता करते हुए, डा अनिल सुलभ ने उन्हें एक विनम्र विदुषी, अविस्मरणीया प्राध्यापिका और प्रतिभाशाली कवयित्री बताया। उन्होंने कहा कि कल ही संध्या उनकी प्रथम काव्य-कृति ‘कही अनकही बातें’ वाणी प्रकाशन से छप कर आयी थी, जिसका उन्होंने संतोष पूर्वक अवलोकन किया और मध्य रात्रि में अपनी लौकिक काया छोड़ दी। जैसे वो इसी की प्रतीक्षा कर रही हों! उनकी यह एक मात्र कृति काव्य-साहित्य में उन्हें अमर करने हेतु पर्याप्त है। इसमें उन्होंने अपने जीवन, जीवनानुभूति, वेदना और लोक-मंगल के सरोकारों की संपूर्ण अभिव्यक्ति कर दी है। उनकी भाषा अत्यंत ही मार्मिक और काव्यात्मक है, जो पाठकों के हृदय को गहराई तक स्पर्श करती है।

शोक-व्यक्त करने वालों में, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा उपेंद्र नाथ पाण्डेय, डा शंकर प्रसाद, डा कल्याणी कुसुम सिंह, डा शिववंश पाण्डेय, कुमार अनुपम, डा जंगबहादुर पाण्डेय, बाँके बिहारी साव, पारिजात सौरभ, ई अशोक कुमार, कृष्ण रंजन सिंह, पुरुषोत्तम प्रसाद, एकलव्य केसरी, संतोष कुमार आदि के नाम सम्मिलित है।

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