बलिया, संजय कुमार तिवारी : बाढ़ आना अधिकारियों और नेताओं के लिए आपदा में औसर तलासने जैसा होता है। जी हां हम बात करते है बलिया के गाय घाट सिंचाई विभाग का निरीक्षण भवन की जहां निरीक्षण भवन के ठीक सामने बाढ़ विभाग के द्वारा बंधे को रिसाव से बचाने के लिए बोरियों में बलूवट मिट्टी भरी जानी चाहिए लेकिन यहां तो धड़ल्ले से प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरी जा रही है। उन बोरियों को जरा गौर से देखिए आधा बोरी से भी कम भरी जा रही है बोरियों में महज मिट्टी भरने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है
इनको कोई देखने वाला तक नही है कहने के लिए ठेकेदार को काम दिया गया है लेकिन मौके पर ठेकेदार भी नही है मजदूर जैसे तैसे बोरियों में भरकर खानापूर्ति कर रह है और ठेकेदार की मिट्टी बच जा रही है इसी को कहते है आपदा में औसर तलासना। बोरियां भरी नही और पैसा का हो जा रहा भुगतान। जब भी एक मजदूर से बात की गई तो उसका कहना है कि गायघाट सिंचाई विभाग का कार्यालय है वही काम हो रहा है यह मिट्टी गंगा नदी में जा रही है बलुअट मिट्टी नही है इसी मिट्टी से न करेंगे गांव के एक लोग है जो बोले है काम करने के लिए अभी तक हम लोग 500 बोरी को भर दिया है अभी बहुत बोरी है भरने के लिए आज सुबह से हम लोग भर रहे है।
