पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ के तहत बिहार को टीबी मुक्त बनाने के लिए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने 14 अगस्त 2026 तक राज्य में 1 करोड़ लोगों की टीबी स्क्रीनिंग का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करते हुए सभी विभागों और जिलाधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करने का निर्देश दिया।
अभी की स्थिति चिंताजनक :
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में 2.76 करोड़ की लक्षित आबादी में से अब तक केवल 0.39 करोड़ यानी 14% लोगों की ही जांच हो पाई है। अधिकतर जिले 20% से भी कम कवरेज पर हैं, जिस पर उन्होंने गहरी चिंता जताई।
मिशन मोड में चलेगा अभियान : मुख्य निर्देश
- निगरानी होगी सख्त: हर ब्लॉक में वरीय उप समाहर्ता स्तर के नोडल पदाधिकारी तैनात होंगे। ये राज्य के साप्ताहिक 9.42 लाख स्क्रीनिंग के लक्ष्य की रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे।
- माइक्रोप्लान से चलेगा कैंप: 674 RBSK मोबाइल हेल्थ टीमों के जरिए स्कूल, हॉस्टल, महादलित टोला और जेलों में विशेष कैंप लगेंगे। जांच का डेटा रोज निक्षय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
- सभी विभागों की जवाबदेही तय:
- शिक्षा विभाग: सभी स्कूल-कस्तूरबा विद्यालयों में 100% छात्रों की जांच
- SC/ST कल्याण: विकास मित्र महादलित टोलों से लोगों को कैंप तक लाएंगे
- ग्रामीण विकास: जीविका दीदी SHG बैठकों में जागरूकता फैलाकर लोगों को आरोग्य मंदिर के कैंप से जोड़ेंगी
- पंचायती राज: मुखिया-वार्ड सदस्य निक्षय मित्र बनकर मरीजों को गोद लेंगे
- जांच और इलाज का टारगेट:
हर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर रोज 10 और मोबाइल टीम द्वारा रोज 100 स्क्रीनिंग जरूरी। टीबी की पुष्टि के लिए ट्रूनेट-CBNAAT मशीन का इस्तेमाल होगा। फिक्स्ड X-Ray से रोज 20 और हैंड-हेल्ड X-Ray से रोज 50 जांच का लक्ष्य रखा गया है।
- पोषण पर विशेष फोकस:
IOCL, NTPC, POWERGRID, BSPTCL और रेड क्रॉस के सहयोग से सभी पंजीकृत निक्षय मित्रों के जरिए हर TB मरीज तक फूड बास्केट पहुंचाना शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने चेतावनी दी कि इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सभी डीएम खुद साप्ताहिक समीक्षा करेंगे ताकि 14 अगस्त तक लक्ष्य पूरा कर बिहार को टीबी मुक्त बनाया जा सके।
