अररिया(रंजीत ठाकुर): जिले में एचआईवी व टीबी से जुड़े मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से कई स्तरों पर जरूरी विभागीय प्रयास किये जा रहे हैं। गौरतलब है कि एचआईवी मरीजों को टीबी का खतरा अधिक होता है। इसलिये टीबी के शत-प्रतिशत मरीजों के एचआईवी जांच पर जोर दिया जाता है। इसी तरह सभी एचआईवी संक्रमित मरीजों के भी टीबी संबंधी जांच को प्राथमिकता दी जाती है। टीबी व एचआईवी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को जिला यक्ष्मा कार्यालय में सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह की अध्यक्षता में एचआईवी व टीबी कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक आयोजित की गयी। कॉर्डिनेशन कमेटी की त्रैमासिक बैठक में सीडीओ सह डीएसीओ डॉ वाईपी सिंह, डीआईओ डॉ मोईज, डीपीएम डीएपीसीयू अखिलेशा कुमार सिंह, जिला टीवी व एचआईवी कॉर्डिनेटर दामोदर शर्मा सहित सभी एसटीएस, एसटीएलएस व परामर्शी ने भाग लिया।
टीबी के सभी मरीजों की एचआईवी जांच जरूरी :
बैठक में सिविल सर्जन विधानंचद्र सिंह ने कहा कि टीबी के सभी मरीजों की एचआईवी जांच होना जरूरी है। डेढ़ से दो साल के बच्चों को छोड़ कर सभी टीबी मरीजों की एचआईवी जांच कराने का निर्देश उन्होंने दिया। उन्होंने एचआईवी मरीजों को एआरटी की सेवा उपलब्ध कराने को कहा। जांच में टीबी संक्रमण का मामला सामने आने पर तत्काल दवा का सेवन शुरू कराने व व नियमित रूप से मरीजों के फॉलोअप का निर्देश उन्होंने दिया।
जिले में टीबी व एचआईवी के मामलों में आयी है कमी :
सीडीओ डॉ वाईपी सिंह ने कहा कि टीबी मरीज को एचआईवी व एचआईवी मरीज को टीबी का खतरा अधिक होता है। दोनों ही रोग से बचाव के लिये जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों की तुलना में जिले में एचआईवी व टीबी दोनों के मामलों में कमी आयी। इसी माह 24 मार्च को आयोजित होने वाले विश्व टीबी दिवस पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।
एचआईवी व टीबी के मामलों को नियंत्रित करने का हो रहा प्रयास :
जिला एड्स बचाव व नियंत्रण इकाई के डीपीएम अखिलेश कुमार सिंह ने एचआईवी मरीजों को टीबी संक्रमण से जुड़े खतरे की तरफ कर्मियों का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि एचआईवी व टीबी से जुड़े मामलों पर प्रभावी नियंत्रण राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एचआईवी मरीजों में टीबी से जुड़े खतरों को कम करने संबंधी उपायों पर उन्होंने विस्तृत चर्चा की। वहीं जिला टीबी व एड्स समन्वयक दामोदर प्रसाद ने विश्व यक्ष्मा दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए कहा कि टीबी सुपरवाइजर की मदद से निर्धारित माइक्रोप्लान के आधार पर आशा फैसिलिटेटर को जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आशा कर्मियों को अपने क्षेत्र में टीबी रोग के प्रति जागरूकता कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इस दौरान जिले के चिह्नित इलाकों में सघन रोगी खोज अभियान का संचालन किया जायेगा। विद्यालय स्तर पर स्कूली बच्चों के बीच क्विज, परिचर्चा सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।
