अररिया, रंजीत ठाकुर गर्भवती महिला व उनके गर्भ में पल रहे संतान के समग्र स्वास्थ्य के आकलन के लिये प्रसव पूर्व जांच यानी एंटीनेनटल चेकअप एएनसी जरूरी है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा व उनके सेहतमंद भविष्य के लिये ये काफी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ पूरे गर्भावस्था काल में कम से कम चार बार एएनसी जांच की सलाह देते हैं। लेकिन पारंपरिक सोच व अज्ञातना के कारण आज भी समुदाय स्तर पर शुरूआती दिनों में गर्भावस्था संबंधी जानकारी छुपाने का चलन है। इस कारण ससमय गर्भवती महिलाओं के एएनसी जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाती है। जो प्रसव संबंधी कई तरह की जटिलताओं का कारण बनता है। इससे निपटने के लिये जिला स्वास्थ्य विभाग विशेष रणनीति के तहत एक नई पहल की शुरुआत करने जा रहा है। ताकि प्रथम तिमाही के अंदर गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर एएनसी जांच की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
एएनसी जांच को बढ़ावा देने में आशा की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रथम तिमाही में एएनसी जांच को लेकर विशेष विभागीय पहल की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने कहा कि एएनसी जांच की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में आशा कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। आमतौर पर जिले में प्रति एक हजार आबादी पर एक आशा कार्यकर्ता बहाल है। संबंधित पोषक क्षेत्र में अनुमानत: 50 से 60 योग्य दंपती होते हैं। इसमें प्रति माह 08 से 10 महिलाओं के गर्भवती होने की संभावना होती है। आशा कार्यकर्ता को ऐसे 10 संभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित करना है। ताकि गर्भवस्था के शुरूआती चरण में एएनसी जांच की प्रक्रिया को शुरू कराया जा सके। इसके लिये आशा क्षेत्र भ्रमण के दौरान नियमित रूप से ऐसे दंपतियों के संपर्क में रहेंगी। आपसी मुलाकात के दौरान सुरक्षित प्रसव को लेकर उपलब्ध सरकारी इंतजाम की जानकारी देते हुए इसके प्रति उनमें विश्वास बहाल करने का प्रयास करेंगी। ताकि सुरक्षित व संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा सके।
आशा के कार्यों की होगी नियमित समीक्षा
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि प्रथम तिमाही में एएनसी जांच की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिये कई स्तरों पर इसका अनुश्रवण व मूल्यांकन किया जायेगा। आशा कार्यकर्ता व आशा फैसीलिटेटर के कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा की जायेगी। संबंधित प्रखंड के बीसीएम के स्तर से आशा व फैसीलिटेटर के कार्यों की समीक्षा की जायेगी। नियमित तौर पर इससे संबंधित रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें बेहतर कार्य के लिये जहां आशा कार्यकर्ता व फैसीलिटेटर को प्रोत्साहित किया जायेगा। वहीं कमतर प्रदर्शन करने वाली आशा को बेहतर करने के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रथम तिमाही में एएनसी जांच में आने वाली किसी रूकावट को चिह्नित कर इसे दूर करने के लिये विभागीय स्तर से जरूरी प्रयास किया जायेगा।
जच्चा बच्चा की सुरक्षा व सेहतमंद जींदगी के लिये जांच जरूरी
जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश कुमार ने बताया कि प्रथम तिमाही में एएनसी जांच को लेकर वीएचएसएनडी के सफल क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा व सेहत के साथ-साथ परिवार की खुशहाली व विकास के लिये उन्होंने गर्भावस्था के प्रारंभिक काल में एएनसी जांच को बेहद उपयोगी व जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि वीएचएसएनडी सत्र से लेकर जिले के सभी एचएससी, एपीएचसी, एचडब्ल्यूसी सहित अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के समुचित जांच व जरूरी दवाओं के साथ जरूरी परामर्श संबंधी सेवाएं संचालित है। एएनसी जांच को बढ़ावा देने के लिये प्रत्येक माह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत विशेष अभियान संचालित कर सहजता पूर्वक इससे जुड़ी सेवाएं लोगों तक पहुंचाने को लेकर जरूरी पहल की जा रही है।
