बिहार

बच्चों पर पढ़ाई के मामले में अपनी इच्छा जबरन ना थोंपे मां-बाप

फुलवारीशरीफ़, अजीत। सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की ओर से साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की श्रृंखला में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक “माता-पिता की इच्छाओं की बलि चढ़ते छात्र” की प्रस्तुति वाल्मी, फुलवारी शरीफ पटना में की गई।

नाटक की शुरुआत अमन राज के स्वरबद्ध गीत- तू कितना नादान रे बंदे, अपने जिगर के टुकड़े को खो दिया, अब क्या कर पायेगा रे बन्दे ……से की गई।

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नाटक के माध्यम से यह दिखाया गया की एक गरीब परिवार के छात्र जेईई परीक्षा में टॉप करता है. गांव वाले उस खुशी का जश्न मनाते हैं.उसके बाद वहां के अभिभावकों द्वारा अपने-अपने बच्चों को इस रेस में शामिल करने का दबाव बनाया जाता है और अपने बच्चों को बिना जांचे-परखे ही देखा-देखी में कोचिंग की नगरी कहे जाने वाले कोटा में तैयारी के लिए भेज दिया जाता है. कोचिंग में बच्चे का अरुचिकर पढ़ाई के बोझ और उधर माता-पिता के दबाव बनाने के कारण बच्चा तनाव में आकर खुदकुशी कर लेता है. उसके सुसाइड नोट में यह पाया जाता है की मम्मी पापा मैं जेईई नहीं कर सकता इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं. सॉरी मम्मी पापा यह आखरी रास्ता है.यह सब देखकर उसके माता-पिता को अपने बेटे को खोने के बाद उसे यह एहसास होता है कि मैं गैरजरूरी दिखावे के कारण अपनी इच्छाओं की बलि बेटा को चढ़ा दिया और आगे न जाने कितने बच्चे मां-बाप की इच्छाओं की बलि चढ़ेंगे.

मंच के सचिव महेश चौधरी ने अभिभावकों तथा पूरे समाज से यह आग्रह किया की सब कोई मिलकर इसका समाधान निकालें. सिर्फ बच्चों के माता-पिता को कोसने से पहले हम अपने भीतर झांके. हमें भी खुद को आईना दिखाने की जरूरत है.कोई भी काम बुरा नहीं होता.बच्चों की इच्छाओं के अनुरूप उसे उसी क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि पढ़ाई के दबाव से ज्यादा अपने माता-पिता की इच्छाओं को पूरा करने का तनाव होता है . अभिभावक अपनी महत्वाकांक्षाएं बच्चों पर न लादे। नाटक के कलाकार महेश चौधरी, मिथिलेश कुमार पांडे, अमन, करण, राहुल, विनोद प्रसाद चौरसिया, गौतम राज, सौरभ कुमार एवं रेहान थे।

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