पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) जिले के कुपोषण बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाने में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच), पूर्णिया में कार्यरत पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहाँ से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जा रहे कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार करते हुए सुरक्षित बनाकर घर भेजा जा रहा है। इससे कुपोषित बच्चे भविष्य में स्वस्थ्य जीवन का लाभ उठाकर सामान्य जीवन आसानी से यापन कर रहे हैं।
अतिरिक्त आहार का सम्पूर्ण सेवन नहीं करने वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा भर्ती कराया जाता है जीएमसीएच के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) :
सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जन्म के बाद नवजात शिशुओं को स्वस्थ्य रखने के लिए छः माह तक केवल माँ के दूध का सेवन कराया जाता है। छः माह बाद शिशुओं को माँ के दूध के साथ अतिरिक्त आहार का भी सेवन कराया जाता है। छः माह बाद अतिरिक्त आहार का सम्पूर्ण सेवन नहीं करने वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है जहाँ शिशुओं को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा आवश्यक पोषण उपलब्ध कराते हुए कुपोषण से सुरक्षित किया जाता है। इसके लिए एनआरसी में विशेषज्ञ डॉक्टर और नर्स उपलब्ध रहते हैं जिससे कि बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराई जाती है। इससे कुपोषित बच्चे बहुत जल्द स्वस्थ्य होते हुए सामान्य जीवन का लाभ उठाते हैं।
31 अक्टूबर तक एनआरसी में भर्ती किए गए हैं 15 कुपोषित बच्चे :
जिला कार्यक्रम समन्यवक (डीपीसी) डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी प्रखंडों से कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए स्वस्थ्य बनाने के लिए कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। एनआरसी में पोषण विशेषज्ञ और नर्स के सहयोग से कुपोषित बच्चों को जांच, दवाई के साथ साथ आवश्यक पोषण आहार उपलब्ध कराई जाती है जिससे कि बच्चे बहुत जल्द स्वस्थ्य हो जाते हैं। वर्ष 2026 में ही अक्टूबर माह जिले के विभिन्न प्रखंडों के 15 कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में चिकित्सकों द्वारा उपचार करते हुए स्वस्थ्य बनाकर घर भेजा गया है। इसमें कसबा प्रखंड के 03, बड़हरा कोठी प्रखंड के 01, डगरुआ प्रखंड के 02, पूर्णिया पूर्व प्रखंड के 04, के. नगर प्रखंड के 02 और कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड के 02 बच्चों को स्वस्थ्य बनाते हुए घर भेजा गया। इसके अलावा जीएमसीएच पूर्णिया के मेडिकल अधिकारी द्वारा 01 कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए स्वस्थ्य बनाने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया। सभी बच्चों को एनआरसी में पोषण विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक पोषाहार उपलब्ध कराते हुए स्वस्थ्य बनाते हुए घर भेजा गया जहाँ बच्चे अपने स्वास्थ्य जीवन का लाभ उठा रहे हैं।
सातवें माह के पहले दिन से शिशु को उपलब्ध कराने चाहिए अतिरिक्त आहार :
डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि शिशुओं को स्वस्थ्य और सुरक्षित रखने के लिए 07 वें माह के पहले दिन से छठे दिन तक प्रतिदिन अतिरिक्त आहार उपलब्ध करानी चाहिए। 07 वें माह के पहले छह दिन शिशु को 02 चम्मच गाढ़ा गीला पोषण उपलब्ध कराना चाहिए। 07 वें माह के सातवें दिन से 08 वें माह के शुरुआत दिन तक कटोरे द्वारा 03 कटोरा गाढ़ा गीला पोषण उपलब्ध कराना चाहिए। 09 वें माह से शिशु को कटोरे द्वारा प्रतिदिन 05 कटोरा अतिरिक्त आहार का सेवन कराना चाहिए जिससे कि शिशु स्वस्थ्य होकर स्वस्थ्य जीवन का लाभ उठा सके। वहीं 10 से 12 माह के बच्चों को सामान्य गाढ़ा भोजन के साथ साथ अन्य अतिरिक्त आहार का सेवन कराना चाहिए। 13 माह से 24 माह के बच्चों को सामान्य गाढ़ा भोजन के साथ साथ अतिरिक्त आहार का सेवन की संख्या का विस्तार करना चाहिए जिससे कि शिशु स्वस्थ्य होकर सामान्य पोषण उपचार का सेवन कर सके और स्वस्थ्य जीवन का सम्पूर्ण लाभ उठा सके।
