कई दशक बाद लौट आया मिट्टी निर्मित कुल्हड़ का दिन

अररिया(रंजीत ठाकुर): पुनः लौट आया मिट्टी निर्मित कुल्हड़ का दिन , चाय की दुकानों में प्लास्टिक के कप की जगह अब मिट्टी निर्मित कुल्हड़ कप का प्रयोग किया जाने लगा है । यह बदलाव पढ़े लिखे युवा चाय दुकानदारों में देखने को मिल रहा है । हाल ही में बथनाहा हाट चौक के करीब बथनाहा के शनि सम्राट नामक युवक के द्वारा कुल्हड़ कैफे के नाम से चाय का दुकान खोला गया है जिसमे ग्राहकों को प्लास्टिक कप के जगह कुल्हड़ में चाय दिया जाता है. जो ग्राहकों को काफी पसंद आ रहा है.

मानव व प्रकृति के लिए फायदेमंद-

कैफे दुकानदार शनि सम्राट ने कहा कि प्लास्टिक कप के जगह कुल्हड़ कप काफी खर्चीला है , कुल्हड़ का कप 150 रुपया सैकड़ा मिलता है जबकि प्लास्टिक का कप 35 से 40 रुपया सैकड़ा मिलता है । वहीं प्लास्टिक का कप जहाँ मानव स्वास्थ्य तथा प्रकृति के लिए हानिकारक है वहीं कुल्हड़ का कप विशुद्ध देशी मिट्टी से निर्मित होने के साथ मानव तथा प्रकृति के लिए भी लाभदायक है । वहीं उन्होंने कहा कि कुल्हड़ का प्रयोग करने से प्लास्टिक कचड़ा से भी निजात मिलेगा.

मिट्टी निर्मित कुल्हड़ का प्रयोग से कुम्हारों के भी दिन बहुरेंगे-

मिट्टी निर्मित कुल्हड़ का चलन बढ़ने से कुम्हारों के लिए भी जीवनदान है । जहाँ मिट्टी निर्मित बर्तनों का चलन लगभग बन्द होने लगा था तो वहीं गरीब कुम्हारों के जीवन यापन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने लगा था । अब जब कि कुल्हड़ का प्रयोग चाय की दुकानों में पुनः प्रारंभ होने से गरीब कुम्हारों के आय के साथ साथ जीवन स्तर में भी सुधार होगा । एक चाय की दुकान में अमूमन 250 से 300 के लगभग कुल्हड़ का प्रयोग नित्यदिन किया जा रहा है । जिससे कैफे दुकानदार को तीन हजार से चार हजार के बीच आय रोजाना हो जाता है.

कम लागत में खोला गया दुकान-

बथनाहा स्थित कुल्हड़ कैफे में दुकानदार शनि के द्वारा एक और नायाब प्रयोग किया गया है जहाँ ग्राहकों के बैठने के लिए किसी प्रकार से टेबुल या कुर्शी का प्रयोग नहीं किया गया है बल्कि ग्राहकों के बैठने के लिए मोटर गाड़ियों से खोला गया बेकार की टायर को अलग अलग रंगों में रंग कर उसे प्लास्टिक की सुतली से गूथकर बैठने लायक बनाया गया है जो बैठने में काफी आरामदायक है तथा बेहद ही कम लागत में ग्राहकों की सुविधा के साथ दुकान को भी खोला गया है।