फुलवारीशरीफ, अजीत। गीत-संगीत की मधुर धुन, छठ गीतों की गूंज, रंगारंग नृत्य और युवाओं की रचनात्मक प्रस्तुतियों से शनिवार को बीआइटी पटना का परिसर गुलजार रहा. मौका था संस्थान की सांस्कृतिक समिति प्रातिबिम्ब की ओर से आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव ‘झलक 2026’ का. महोत्सव में छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा और कला का ऐसा रंग जमाया कि पूरा परिसर सांस्कृतिक उमंग से सराबोर हो गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. डीके मल्लिक समेत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस मौके पर प्रातिबिम्ब की फैकल्टी इंचार्ज डॉ. शील शालिनी, मेंटर डॉ. प्रेमलता सिंह एवं डॉ. नैयर इकबाल, असिस्टेंट रजिस्ट्रार तृषा कुमार, चीफ वार्डन डॉ. अभिनव शाण्डिल्य, स्टूडेंट एक्टिविटी कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. आशीष मोहन दुबे तथा प्रातिबिम्ब के जनरल सेक्रेटरी पृथु दत्त और निधि सिन्हा मौजूद रहे. इस दौरान प्रातिबिम्ब की वार्षिक पत्रिका का विमोचन भी किया गया.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना से हुई. इसके बाद छठ गीतों की प्रस्तुति ने बिहार की लोक संस्कृति और परंपरा की खूबसूरत झलक पेश की. एकल गायन, समूह संगीत, शास्त्रीय और सामूहिक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया. वहीं कविता पाठ, शायरी और हास्य नाटिका ने कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ साहित्यिक रंग भी घोले. महोत्सव के दौरान थीम रिवील भी आकर्षण का केंद्र रहा.
फैकल्टी इंचार्ज डॉ. शील शालिनी ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है. कला, संस्कृति, साहित्य और रचनात्मक गतिविधियां भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उन्होंने युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और हर मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे आने के लिए प्रेरित किया.
महोत्सव में प्रथम वर्ष से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं तक के विद्यार्थियों की भागीदारी रही. संगीत, नृत्य, साहित्य और लोक संस्कृति के संगम ने ‘झलक 2026’ को यादगार बना दिया. पूरे आयोजन में युवाओं का उत्साह और दर्शकों की तालियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
