बिहार

नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है : प्रीति प्रिया राज

अररिया(रंजीत ठाकुर): चाहे खेल कूद हो अथवा अंतरिक्ष विज्ञान, हमारे देश की महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। वे आगे बढ़ रही हैं और अपनी उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ा रही हैं। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है। यह जरूरी है कि हम स्वयं को और अपनी शक्तियों को समझें। जब कई कार्य एक समय पर करने की बात आती है तो महिलाओं को कोई पीछे नहीं कर सकता। यह उनकी शक्ति है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए।

आइये हम लड़कियों के जन्म होने पर खुशियां मनाएं। हमें अपनी बेटियों पर समान रूप से गर्व होना चाहिए। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि बेटी के पैदा होने पर पांच पौधे लगाकर खुशियां मनाएं। हमें समाज में ही नहीं, बल्कि परिवार के भीतर भी महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव को रोकना होगा। महिलाओं को खुद से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए – सही मायने में हम तभी नारी सशक्तिकरण को सार्थक कर सकते हैं।

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नारी सशक्तिकरण में आर्थिक स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चाहे वो शोध से जुड़ी गतिविधियां हों या फिर शिक्षा क्षेत्र, महिलाएं काफी अच्छा काम कर रही हैं। कृषि के क्षेत्र में भी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रत्येक महिला में उद्यमिता के गुण और मूल्य होते हैं। यदि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों तो महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में बड़ी भूमिका अदा कर सकती हैं। महात्मा गांधी ने कहा था, जब नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित होते हैं। इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि जब हम नारी शिक्षित होते हैं तो न केवल दो परिवारों बल्कि दो पीढ़ियों को शिक्षित करते हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आंदोलन तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आज यह सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा है, यह एक सामाजिक संवेदना का, लोक शिक्षा का अभियान बन गया है। महिला – वो शक्ति है, सशक्त है, वो भारत की नारी है, न ज्यादा में, न कम में, वो सब में बराबर की अधिकारी है। चाहे खेल हो या अंतरिक्ष विज्ञान, हमारे देश की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे कदम से कदम मिला कर आगे बढ़ रही हैं और अपनी उपलब्धियों से देश का नाम रौशन कर रही हैं। मानवता की प्रगति महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना अधूरी है। आज मुद्दा महिलाओं के विकास का नहीं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का है।

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