बिहार

खाकी की जिम्मेदारी से सुरों की साधना तक, पूर्व DGP आलोक राज की आवाज में T-Series ने रिलीज किया ‘जोतावाली शेरावाली मां’

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पुलिस की वर्दी, अपराधियों के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों के बीच एक ऐसा शख्स भी रहा, जिसने अपने भीतर संगीत के प्रति प्रेम को कभी खत्म नहीं होने दिया। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज की पहचान एक सख्त और अनुभवी पुलिस अधिकारी के साथ-साथ संगीत के साधक के रूप में भी रही है। अब उनकी इसी संगीत यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की प्रतिष्ठित म्यूजिक कंपनी T-Series ने उनकी आवाज में देवी मां का भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ रिलीज किया है। इस गीत के जरिए आलोक राज एक बार फिर अपनी गायकी को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि पुलिस सेवा की व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने संगीत से अपना रिश्ता बनाए रखा और बाकायदा शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेकर गायकी को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया।

छह साल की साधना के बाद शुरू हुआ संगीत का सफर

आलोक राज का संगीत से जुड़ाव कोई नया नहीं है। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही उन्हें फिल्मी गाने गाने का शौक था। हालांकि, 20 अगस्त 1989 को आईपीएस सेवा में आने के बाद पुलिस की व्यस्त जिम्मेदारियों के कारण उनका यह शौक पीछे छूट गया। करीब 22 साल तक पुलिस सेवा में व्यस्त रहने के बाद दिसंबर 2011 में उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेनी शुरू की। संगीत गुरु अशोक कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रशिक्षण लिया और करीब छह साल तक नियमित रियाज किया। इसके बाद वर्ष 2017 में T-Series के बैनर तले उनका पहला म्यूजिक एल्बम ‘साईं रचना’ रिलीज हुआ।

नीरज के गीतों से कबीर के भजनों तक दी आवाज

आलोक राज ने साहित्य और संगीत जगत के कई दिग्गजों की रचनाओं को अपनी आवाज दी है। उन्होंने पद्मभूषण से सम्मानित कवि गोपालदास नीरज के गीतों पर आधारित एक एल्बम तैयार किया था। इसके लिए उन्होंने नीरज से उनके गीतों के अधिकार भी प्राप्त किए थे। इसके बाद मशहूर कवि और शायर दुष्यंत कुमार की गजलों को अपनी आवाज दी। कबीर के भजनों पर आधारित एल्बम भी रिलीज किया। भगवान शिव पर गाया उनका भजन ‘ये भोला सबसे बड़ा है’ भी काफी चर्चित हुआ। इसके अलावा ‘जय अंबे मां जय जय अंबे मां’ और ‘वल्कल ना ओढ़ री’ जैसे गीतों में भी उनकी गायकी सुनने को मिली है।

1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं आलोक राज

मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले आलोक राज 1989 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। एकीकृत बिहार के दौरान रांची, गुमला, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में तैनात रहे। इसके बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में DIG और IG के पद पर भी सेवाएं दीं। वर्ष 2004 से 2011 के बीच CRPF में रहते हुए उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटना में ASP रहते हुए एक पुलिस मुठभेड़ में चार अपराधियों के मारे जाने के मामले में उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक भी मिला था। वहीं, पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा नैनो प्लांट के विरोध में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान CRPF के IG के रूप में उन्होंने कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उस समय नंदीग्राम में शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने की दिशा में उनकी भूमिका की काफी चर्चा हुई थी।

करीब 105 दिनों तक संभाली बिहार के DGP की जिम्मेदारी

30 अगस्त 2024 को आलोक राज ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) का प्रभार संभाला था। तत्कालीन डीजीपी आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, उनका कार्यकाल करीब 105 दिनों का ही रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने पुलिस व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की थीं। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। 31 दिसंबर 2025 को वह पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए। पदभार संभालते ही आलोक राज ने बिहार पुलिस को बेहतर बनाने के लिए छह मूलमंत्र दिए थे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों को ‘6 स’ के सिद्धांत पर काम करने की सलाह दी थी। इसमें समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्तिशाली होना, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल शामिल थे। उनका जोर पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने, हर कार्रवाई को प्रभावी बनाने, पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहने और अपराधियों में कानून का भय कायम करने पर था। साथ ही, उन्होंने समय पर जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल करने और स्पीडी ट्रायल के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने पर भी जोर दिया था।

तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हो चुके हैं आलोक राज

आलोक राज का शैक्षणिक और पुलिसिंग का सफर भी उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से भूगर्भशास्त्र में एमएससी की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की। उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक से नवाजे गए। इसके अलावा, वर्ष 2019 में उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए उन्हें अटल रत्न सम्मान भी मिला। पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। पश्चिमी सिंहभूम के एसपी रहते हुए वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि हजारीबाग के एसपी के रूप में कोयला माफिया और नक्सलियों के विरुद्ध अभियान चलाया। उन्होंने इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। बिहार पुलिस में उन्होंने विशेष शाखा, सीआईडी और विधि-व्यवस्था के एडीजी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। इसके अलावा बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पुलिस प्रशिक्षण और बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली।

संगीत को मानते हैं व्यक्तित्व निखारने का माध्यम

आलोक राज सिर्फ संगीत की औपचारिक साधना तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि कई बड़े मंचों पर भी अपनी गायकी का हुनर दिखा चुके हैं। बिहार दिवस के अलावा सोनपुर के हरिहरक्षेत्र महोत्सव, बोधगया के बौद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, पावापुरी महोत्सव और ताज महोत्सव जैसे आयोजनों में उन्होंने प्रस्तुति दी है। आकाशवाणी, दूरदर्शन और डीडी उर्दू के कार्यक्रमों में भी उनकी गायकी सुनने को मिली है। उनका मानना है कि संगीत इंसान के व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुलिस जैसी तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति के लिए कला और संगीत सकारात्मकता बनाए रखने का माध्यम हो सकते हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक और पुलिस सेवा की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने अपने संगीत के शौक को जिंदा रखा। अब T-Series के नए भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ के साथ आलोक राज की आवाज एक बार फिर श्रोताओं तक पहुंच रही है। इस गीत का संगीत निर्देशन दिलीप सेन-समीर सेन ने किया है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। खास बात यह भी है कि इस गाने में आलोक राज खुद नजर आ रहे हैं। इसे T-Series Bhakti Sagar के बैनर तले रिलीज किया गया है।

Related posts

आठ पुलिसकर्मी निलंबित; रिश्वत लेकर दो लोगों को छोड़ने का आरोप

जन्मजात क्लबफुट की ग्रसित बच्चों को सुरक्षित करने के लिए सदर अस्पताल में शुरू हुआ विशेष ओपीडी

बीआईटी मेसरा पटना में छात्र क्लब ‘ऊर्जा’ का शुभारंभ, वार्षिक पत्रिका ‘स्पार्क’ का विमोचन