बिहार

कार्डिकॉन 2026 में नई तकनीक और आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

फुलवारी शरीफ, अजीत : कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, बिहार अध्याय का 32वां वार्षिक अधिवेशन कार्डिकॉन 2026 रविवार को संपन्न हो गया. दो दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन करीब 14 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए. इनमें देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हृदय रोग विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, नई तकनीकों, उपचार की चुनौतियों और हृदय रोगों से बचाव के उपायों पर चर्चा की.

आयोजन सचिव व वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक सत्रों में गर्भावस्था के दौरान हृदय रोगों से होने वाली जटिलताओं और उच्च रक्तचाप पर विशेष चर्चा हुई. दिल्ली के डॉ. सुभेंदु मोहंती ने बताया कि कई बार गर्भवती महिलाओं में पहले से हृदय रोग नहीं होने के बावजूद प्रसव के बाद गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. ऐसे मामलों में समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन जरूरी है.

डॉ. आर डी यादव ने पेसमेकर की नई तकनीक, विशेष रूप से हृदय की प्राकृतिक विद्युत प्रणाली के अनुरूप पेसिंग की जानकारी दी. उन्होंने बिना तार वाले पेसमेकर को सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया बताते हुए इसके उपयोग पर चर्चा की. कोलकाता के डॉ. दिलीप कुमार और डॉ. संजीव मुखर्जी ने हृदय की अनियमित धड़कन पर विस्तार से विचार रखे.

मेदांता अस्पताल के डॉ. प्रमोद कुमार ने जटिल हृदय धमनी अवरोध के उपचार में आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गंभीर और जटिल अवरोध के उपचार में रोटाब्लेशन तथा रक्त वाहिका के भीतर की जांच जैसी तकनीकों से मरीजों का बेहतर उपचार संभव है.

कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, बिहार अध्याय के सचिव डॉ. अशोक कुमार ने उच्च रक्तचाप को गंभीर बीमारी बताते हुए कहा कि किडनी और तंत्रिका संबंधी बीमारियों के कारण भी रक्तचाप बढ़ सकता है. समय पर जांच और उचित नियंत्रण से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

एम्स पटना के हृदय वक्ष शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने हृदय रोग चिकित्सा और हृदय शल्य चिकित्सा के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों विभागों को अलग-अलग कार्य करने के बजाय एक टीम के रूप में काम करना चाहिए. संयुक्त चिकित्सा प्रक्रिया के माध्यम से जटिल हृदय रोगों, विशेषकर हृदय की धमनियों और हृदय के वाल्व से जुड़ी बीमारियों का बेहतर उपचार संभव है. इसके लिए ऐसे संयुक्त शल्य चिकित्सा कक्ष की जरूरत है, जहां कैथेटर आधारित उपचार और कम चीरे वाली हृदय शल्य चिकित्सा की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों.

मेदांता अस्पताल के डॉ. शमशाद आलम ने हृदय की कमजोर पंपिंग के आधुनिक उपचार और बेहतर प्रबंधन पर चर्चा की. डॉ. अजय कुमार ने मोटापा और मधुमेह को हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए मधुमेह नियंत्रण पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कुछ आधुनिक दवाएं मधुमेह के साथ हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी लाभकारी हैं.

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम कुमार ने किडनी और हृदय रोगों के बीच संबंधों पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि किडनी की खराबी से हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है.

एम्स पटना की हृदय रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुपम बम्बानी ने हृदय के दाहिने हिस्से की कार्यक्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान अक्सर हृदय के इस हिस्से की कार्यक्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता, जबकि इसकी कमजोरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है. इसलिए हृदय की ध्वनि तरंग जांच के माध्यम से इसकी कार्यक्षमता का नियमित आकलन जरूरी है. इस विषय पर डॉ. श्रद्धा रंजन और डॉ. रंजन कुमार ने भी विचार रखे.

वेल्लोर से आए डॉ. जेशू कृपा शुक्ला ने आपात स्थिति में सीने में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की जांच में हृदय की ध्वनि तरंग जांच की महत्वपूर्ण भूमिका बताई. इससे हृदय की धमनियों की बीमारी के अलावा सीने में दर्द के अन्य संभावित कारणों की भी पहचान की जा सकती है.

वार्षिक आमसभा में डॉ. संदीप कुमार बने नए अध्यक्ष

सम्मेलन के अंतिम चरण में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, बिहार अध्याय की वार्षिक आमसभा हुई. आयोजन अध्यक्ष डॉ. बी बी भारती ने सम्मेलन की सफलता पर प्रसन्नता जताई. सम्मेलन के वैज्ञानिक सचिव और जीवक हार्ट अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि आमसभा में इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार को बिहार अध्याय का नया अध्यक्ष चुना गया. निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने औपचारिक रूप से उन्हें पदभार सौंपा और बधाई दी.

डॉ. एस.एस. चटर्जी, डॉ. यूसी शामल, डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. के.के. वरुण, डॉ. अभिनव भगत, डॉ. अनूप, डॉ. यूएन सिंह और डॉ. अजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बधाई दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि नई कार्यकारिणी बिहार में हृदय रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बचाव संबंधी कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कार्य करेगी.

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन आपसी सौहार्द, उत्साह और भविष्य में मिलकर काम करने के संकल्प के साथ हुआ.

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