बिहार

गरीबों के लिए अभिशाप भी है मृत्यु भोज

अररिया, रंजीत ठाकुर : मृत्यु भोज एक सामाजिक बुराई हीं नहीं,बल्कि गरीब के लिए एक अभिशाप के समान है। अमीर व संभ्रांत लोग मृत्युभोज में बड़ी संख्या में लोगों को खाना खिलाकर अपना रूतबा समाज में कायम करने का प्रयास करते हैं,लेकिन यह रूतबा गरीबों के लिए अभिशाप बन जाता है। रीति-रिवाजों के चलते उन्हें कर्ज लेकर या फिर चल और अचल संपत्ति बेचकर न चाहते हुए भी मृत्यु में भोज करना होता है। गरूड़ पुराण एवं नारद पुराण में उद्धृत ब्रह्मभोज की परिभाषा को लोग मृत्युभोज करार दे दिया है। आमतौर पर लोग मृत्युभोज को अपनी हैसियत से जोड़कर देखने लगे हैं,जो सर्वथा अनुचित है।

इस परंपरा से सभी तबके के लोगों में खासकर गरीब लोग आर्थिक रूप से कर्जदार हो जाते हैं। गम में भी भोज और खुशी में भी भोज अच्छा नहीं लगता है। असाध्य रोग से अगर किसी की मौत होती है तो भी लोग मिथ्या मर्यादा बनाए रखने के लिए एक बड़ा भोज कर डालते हैं। जबकि रोगी के उपचार पर लाखाें खर्च के बाद भी कई परिवार टूट गए होते हैं। उक्त बातें ताराचंद बिराजी मेमोरियल हास्पिटल के डायरेक्टर डा अनिल बिराजी ने कही। मौका था नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र के अंचरा पंचायत के पूर्व मुखिया स्वर्गीय ताराचंद बिराजी की 75 वर्षीय पत्नी गीता देवी के असामयिक निधन के पश्चात गुरुवार को श्राद्धकर्म पर आयोजित मृत्युभोज से जुड़ी सामाजिक बैठक का। इस बैठक की अध्यक्षता ताराचंद बिराजी मेमोरियल हास्पिटल के डायरेक्टर डा अनिल बिराजी ने किया।

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संचालन नरेश कुमार बिराजी ने किया। इस मौके पर वक्ताओं ने बताया कि कैसे सदियों से चली आ रही इस कुरीति के चलते कितने गरीब परिवारों का आशियाना तक बिक गया। जमीन व जायजाद बिक गयीं। कई पीढ़ियां गरीबी की दलदल में फंसती चली गई। लेकिन,मृत्यु भोज से किसी भी समाज के परिवार का उद्धार नहीं हो सका। वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु पश्चात जाति व सामाजिक लोगों के दबाव में आकर लोग अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई व जमीन से लेकर घर तक बेच देते हैं। बुद्धजीवियों ने एकमत होकर इस भोज को समाप्त करने का संकल्प लिया। ताकि इसके बदले अपने परिवारों के स्वास्थ्य व बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में उन्हें पैसों की कठिनाइयां न झेलनी पड़े।

वक्ताओं ने गांव व इलाके के तमाम लोगों को इस मुहिम में साथ देने व आगे बढ़ने की अपील की। पोस्टमास्टर नरेश विराजी ने कहा अगर इसी तरह सभी लोग मृत्यु भोज का बहिष्कार करेंगे तो जो लोग कर्ज लेकर मृत्यु भोज करते हैं वह इस तरह नहीं करेंगे। मृत्यु भोज का पूर्ण तरह बहिष्कार होनी चाहिए और इसमें सभी लोगों को एक साथ होकर चलना चाहिए ताकि लोगों को इस मुहिम से जानकारी मिले। संस्कार के अंतिम दिन संतमत सत्संग का आयोजन किया गया। इस मौके पर डा अनिल विराजी एवं नरेश विराजी में पंचायत के विधवा महिलाओं एवं निसहाय महिलाओं को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।

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