पटना, जया कुमारी : बिहार सरकार जन्म और मृत्यु के सार्वभौमिक और समयबद्ध पंजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसी कड़ी में योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने यूनिसेफ और यूएनईएससीएपी के सहयोग से सोमवार को पटना में “नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी प्रणाली में सुधार” विषय पर कार्यशाला आयोजित की।
रिपोर्ट और जागरूकता सामग्री का विमोचन
कार्यक्रम में सीआरवीएस प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए तैयार मूल्यांकन, विश्लेषण एवं पुनर्रचना रिपोर्ट, नीति संक्षेपिका और जन-जागरूकता सामग्री का विमोचन किया गया। इस रिपोर्ट में बिहार की पंजीकरण व्यवस्था की खामियों और सुधार के उपायों को बताया गया है।
मंत्री का निर्देश – गांव-गांव तक पहुंचे पंजीकरण
मुख्य अतिथि योजना एवं विकास मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं और अधिकारों तक नागरिकों की पहुंच का माध्यम है।”_ उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करें और परिवारों तक पहुंचकर पंजीकरण के लिए जागरूकता बढ़ाएं। सूचना पट्टों और स्थानीय माध्यमों से प्रचार पर भी जोर दिया।
ACS बोलीं – डेटा से बनेगी नीति
अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि सीआरवीएस के दो मकसद हैं – सही समय पर विश्वसनीय आंकड़े जुटाना और उन आंकड़ों से नीति बनाना। उन्होंने माना कि प्रवासी और वंचित परिवारों में जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती है। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, पंपलेट, सामुदायिक अभियान चलाए जाएंगे।
विकास आयुक्त: 90% जन्म अस्पताल में, पंजीकरण का मौका
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में करीब 90% जन्म अब स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं। इससे जन्म पंजीकरण आसान हुआ है। उन्होंने संस्थागत जन्मों के साथ-साथ घर पर होने वाले जन्मों के पंजीकरण पर भी जोर दिया।
रिपोर्ट में क्या निकला?
यूएनईएससीएपी की विशेषज्ञ डॉ. क्लोई मर्सिडीज हार्वे और यूनिसेफ के डॉ. अभय कुमार ने बताया कि रिपोर्ट में सेवा वितरण, संस्थागत क्षमता, जन-जागरूकता और समन्वय की चुनौतियों को चिन्हित किया गया है। सिफारिशों से सिस्टम को ज्यादा नागरिक-केंद्रित और दक्ष बनाया जाएगा।
आगे क्या होगा?
इस रिपोर्ट के आधार पर मानकीकृत कार्य संचालन प्रक्रिया SOP बनाई जाएगी। इससे पंजीकरण कवरेज बढ़ेगा और नीति-निर्माण में डेटा का बेहतर इस्तेमाल होगा।
कार्यक्रम में राज्य-जिला स्तर के अफसर, विभागों के प्रतिनिधि और विकास सहयोगी संस्थाएं शामिल हुईं। अंत में निदेशक रंजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
