फुलवारीशरीफ, अजीत। बेउर थाना क्षेत्र में एनजीओ के नाम पर निवेश कराने और कार-बाइक दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है. पीड़ितों का आरोप है कि स्वराज राष्ट्रीय ह्यूमन फाउंडेशन के नाम से संचालित संस्था के जरिए लोगों को रकम लगाने पर कम समय में दो से तीन गुना तक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया जाता था. वहीं, कार और बाइक खरीदने वालों को भी कीमत में भारी छूट और वाहन की किस्त संस्था की ओर से चुकाने का प्रलोभन दिया गया. पीड़ितों के मुताबिक इस तरीके से पटना समेत गया, जहानाबाद, मखदुमपुर, बिहटा, पालीगंज और आरा सहित कई इलाकों के 25 से 30 लोगों से दस करोड़ रुपये से अधिक की राशि लेने का आरोप है।
मामले से आक्रोशित कई पीड़ित शनिवार को बेउर थाना क्षेत्र के 70 फीट स्थित संस्था के कार्यालय पहुंचे. वहां उन्होंने सुमित श्रीवास्तव को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. मामले में पूजा श्रीवास्तव और कौशल सिंह के भी नाम सामने आये हैं, जिनके फरार होने की बात बतायी जा रही है. पीड़ितों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तीन साल पहले संस्था खोलकर शुरू किया गया था नेटवर्क-
पीड़ितों के अनुसार, करीब तीन वर्ष पहले स्वराज राष्ट्रीय ह्यूमन फाउंडेशन के नाम से संस्था का संचालन शुरू किया गया था. धीरे-धीरे बिहार के अलग-अलग जिलों में इसकी शाखाएं खोली गयीं. इन कार्यालयों के माध्यम से लोगों को संस्था से जोड़ने और निवेश कराने का काम किया जाता था. आरोप है कि लोगों को संस्था की योजनाओं की जानकारी देने और उन्हें कार्यालय तक लाने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को लगाया गया था. प्रत्येक ग्राहक को संस्था से जोड़ने के बदले लाइनर को राशि दिये जाने की बात भी सामने आयी है।
लोगों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं का प्रचार किया जाता था. नकद रकम जमा करने पर कम समय में तीन गुना तक राशि वापस करने का दावा किया जाता था. अधिक रकम निवेश करने वालों को ज्यादा लाभ का भरोसा देकर उनसे लाखों रुपये लिये जाने का आरोप है. शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान कर विश्वास कायम करने के बाद उनसे बड़ी रकम लगवाये जाने की भी शिकायत सामने आयी है।
हेल्थ कार्ड के नाम पर भी राशि लेने का आरोप-
संस्था की ओर से हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने का भी दावा किया जाता था. पीड़ितों के अनुसार एक हेल्थ कार्ड के लिए 500 रुपये लिये जाते थे और कार्डधारक को पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था. इसी तरह की योजनाओं का प्रचार कर बड़ी संख्या में लोगों को संस्था से जोड़ने की कोशिश की गयी।
वाहन खरीद में छूट और किस्त भरने का दिया भरोसा-
ठगी का दूसरा तरीका कार और बाइक से जुड़ा बताया जा रहा है. पीड़ितों का कहना है कि संस्था की ओर से वाहन खरीदने पर करीब 40 प्रतिशत तक लाभ या छूट दिलाने का दावा किया जाता था. बड़ी गाड़ी खरीदने के इच्छुक लोगों को बैंक ऋण के माध्यम से वाहन दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी. इसके बाद वाहन की कुल कीमत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा संस्था को नकद या चेक के माध्यम से वापस लेने का आरोप है।
लोगों को बताया जाता था कि वाहन की शेष किस्तें संस्था की ओर से बैंक में जमा करायी जाएंगी. आरोप है कि शुरुआत में एक-दो किस्त जमा करने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया. इसके बाद वाहन मालिकों पर बैंक की ओर से बकाया राशि का दबाव बढ़ने लगा. कई पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने संस्था की योजना पर भरोसा कर अपने परिवार की जरूरतों और यहां तक कि बेटियों की शादी के लिए भी वाहन लिया था, लेकिन किस्त नहीं जमा होने के कारण बैंक ने वाहन जब्त कर लिया।
ससुराल से वाहन उठाये जाने का भी आरोप-
पीड़ितों में शामिल कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि शादी के बाद वाहन ससुराल भेजे जाने के बावजूद बैंक की बकाया किस्त जमा नहीं होने पर वाहन वहां से ही जब्त कर लिया गया. इससे परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ सामाजिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा. पीड़ितों का कहना है कि संस्था की ओर से उन्हें लगातार भरोसा दिया जाता रहा कि वाहन की किस्त समय पर जमा करा दी जायेगी, लेकिन बाद में संस्था की ओर से भुगतान बंद कर दिया गया।
लाखों रुपये लगाकर अब कार्यालयों के चक्कर लगा रहे पीड़ित-
नकद निवेश करने वाले लोगों की स्थिति भी खराब है. जिन लोगों ने अपनी जमा पूंजी मुनाफे की उम्मीद में संस्था में लगायी थी, उनका कहना है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी न तो मूलधन लौटाया गया और न ही promised मुनाफे की राशि मिली. कई लोग लगातार संस्था के कार्यालय और संचालकों से संपर्क करते रहे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद पीड़ितों ने एकजुट होकर शनिवार को कार्यालय पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया।
पीड़ितों ने बतायी अलग-अलग रकम-
पीड़ितों की ओर से पुलिस को दी गयी जानकारी के अनुसार बिहटा निवासी नरेंद्र कुमार से 27 लाख रुपये, जहानाबाद निवासी गौतम कुमार से 10 लाख रुपये और बिहटा के राजेश कुमार से 2.25 लाख रुपये लिये जाने का आरोप है. पालीगंज के राकेश कुमार से 85 हजार रुपये, कृष्णदेव कुमार से पांच लाख रुपये, राजू कुमार से 75 हजार रुपये और हरेराम से 86 हजार रुपये लिये जाने की शिकायत की गयी है. इसके अलावा जहानाबाद, गया, मखदुमपुर, बेला और आरा सहित अन्य इलाकों के कई लोगों ने भी लाखों रुपये की राशि फंसने की बात पुलिस को बतायी है।
पीड़ितों का दावा है कि सामने आयी रकम के अलावा भी बड़ी संख्या में लोगों ने संस्था में पैसा लगाया है. पुलिस के पास लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं. ऐसे में ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की वास्तविक संख्या बढ़ने की संभावना जतायी जा रही हैं।
पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा, अन्य की तलाश-
फुलवारी शरीफ के पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी-1 नारायण उपाध्याय ने बताया कि मामले में 20 से 30 लोगों के आवेदन पुलिस को प्राप्त हुए हैं. शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी।
बेउर थानाध्यक्ष अफसर हुसैन ने बताया कि मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस संस्था से जुड़े दस्तावेज, लेन-देन और शिकायतकर्ताओं की ओर से उपलब्ध कराये गये कागजातों की भी जांच कर रही है. अन्य आरोपितों की भूमिका और उनके ठिकानों की जानकारी जुटायी जा रही है।
