पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) पटना जिले से होकर बहने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण उत्पन्न बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जहां जिस प्रकार की आवश्यकता हो, वहां उसी के अनुरूप तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने तथा प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
संचालित सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़कर हुई 25
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में जिले में कुल 25 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं, जहां अब तक 70 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है।
इनमें बाढ़ अंचल में 1, दानापुर में 1, पाटलिपुत्रा में 2, अथमलगोला में 1, बख्तियारपुर में 3, मोकामा में 8, मनेर में 2, संपतचक में 1, दीदारगंज में 3, फुलवारीशरीफ में 1 एवं पुनपुन में 1 सामुदायिक रसोई केंद्र शामिल हैं।
सभी सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास आवश्यक मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
20 मेडिकल कैंप एवं 28 एम्बुलेंस तैनात
बाढ़ प्रभावित सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास कुल 20 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। लोगों की त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए 28 एम्बुलेंस तथा 6 बोट एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं। बोट एम्बुलेंस बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण कर आवश्यकता के अनुसार लोगों को चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
सभी मेडिकल कैंपों में जीवन रक्षक दवाओं के साथ- साथ सर्पदंश एवं कुत्ता काटने की दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों एवं अन्य जरूरतमंदों के लिए आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी सिविल सर्जन द्वारा स्वयं की जा रही है।
स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय की समुचित व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों को पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए पीएचईडी द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में अस्थायी शौचालय भी उपलब्ध कराए गए हैं। नगर निगम द्वारा सभी सामुदायिक केंद्रों पर नियमित रूप से साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
पशुओं के लिए 15 शिविर संचालित
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा एवं उपचार के लिए 15 पशु शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु चारा तथा इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच अब तक 3,000 पॉलीथीन शीट्स का भी वितरण किया जा चुका है।
तटबंधों की की जा रही लगातार निगरानी, आवश्यकतानुसार की जा रही मरम्मति एवं सुदृढीकरण
जिन स्थानों पर तटबंधों में रिसाव अथवा ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न हुई, वहां जल संसाधन विभाग की टीम द्वारा तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ के कारण जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर अभी पानी जमा है, वहां जलस्तर कम होने के बाद सड़कों की मरम्मत कर आवागमन को सुचारु किया जाएगा।
166 नौकाएं लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए तैनात
बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता एवं सुरक्षित आवागमन के लिए जिले में कुल 166 नौकाएं तैनात की गई हैं। ये नौकाएं लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर ऊंचे स्थानों तक पहुंचाने तथा आवश्यक आवागमन में सहायता कर रही हैं।
अथमलगोला में 7, बख्तियारपुर में 21, बाढ़ में 8, दानापुर में 25, मनेर में 25, पाटलिपुत्रा में 19, पुनपुन में 3, फतुहा में 30, दीदारगंज में 18, मोकामा में 6, पालीगंज में 2 एवं फुलवारीशरीफ में 2 नौकाएं तैनात हैं।
इसके अतिरिक्त लोगों की सहायता के लिए एसडीआरएफ की 8 टीमें एवं एसएसबी की 2 टीमें अधिक आवागमन वाले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।
जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने बाढ़ प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे बिल्कुल घबराएं नहीं। जिला प्रशासन पूरी तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ उनकी सहायता के लिए हर समय तैयार है। उन्होंने लोगों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध राहत एवं बचाव संसाधनों का उपयोग करने की अपील की है।
जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जा रहा है।
