फुलवारीशरीफ, अजित। कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) बिहार चैप्टर के चौथे वार्षिक सम्मेलन का रविवार को सफल समापन हो गया. दो दिनों तक चले इस वैज्ञानिक सम्मेलन में बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हृदय रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया. सम्मेलन में हृदय रोगों के आधुनिक उपचार, नई तकनीकों और मरीजों की बेहतर देखभाल को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
सम्मेलन के दौरान आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में हृदय रोग चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध, जटिल रोगों के उपचार और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए. चिकित्सकों ने कहा कि नई तकनीकों के कारण अब कई जटिल हृदय रोगों का उपचार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गया है।
समापन समारोह में सीएसआई बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार और सचिव डॉ. अशोक कुमार ने सफल आयोजन के लिए आयोजन सचिव डॉ. शमशाद आलम तथा आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार को सम्मानित किया. इस अवसर पर टिकुली कला और शॉल भेंट कर उन्हें बधाई दी गई। जीवक हार्ट अस्पताल के डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया और अगले वर्ष भी पटना में इसी तरह के वैज्ञानिक आयोजन में शामिल होने की सहमति जताई।
वैज्ञानिक सत्रों में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ. आदित्य कपूर ने स्नातकोत्तर चिकित्सकों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन किया, जिसमें एम्स पटना की टीम विजेता रही. नई दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय त्रेहान ने विशेष व्याख्यान में भारत में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के विकास की यात्रा पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि देश में कैथ लैब तकनीक के विस्तार से हृदय रोगियों के उपचार में बड़ा बदलाव आया है।
लीडलेस पेसमेकर विषय पर आयोजित सत्र में नई दिल्ली के डॉ. बलवीर सिंह, कोलकाता के डॉ. अनिल मिश्रा और डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि बिना तार वाले पेसमेकर मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक साबित हो रहे हैं. इससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है।
हैदराबाद की डॉ. दलजीत कौर सग्गू ने हृदय की अनियमित धड़कनों के उपचार में नई पेसिंग तकनीकों के लाभ बताए. वहीं नई दिल्ली के डॉ. आर.डी. यादव ने मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली कैरोटिड धमनी में स्टेंट लगाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। सम्मेलन में डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. निशांत त्रिपाठी, डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. के.के. बरुण, डॉ. यू.सी. सामल, डॉ. एस.एस. चटर्जी, डॉ. बी.बी. भारती समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे वैज्ञानिक सम्मेलन चिकित्सकों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच हैं, जिससे बिहार में हृदय रोगियों को और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
