बिहार

AES से निपटने को लेकर बिहार सरकार अलर्ट, मुख्य सचिव बोले- “चमकी बुखार में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं”

पटना, नरेश अग्रवाल : एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार से निपटने के लिए बिहार सरकार ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य कार्यबल (State Task Force) की उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें 12 प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को 24×7 अलर्ट पर रखने के निर्देश दिए गए।

बैठक की बड़ी बातें :

  1. स्वास्थ्य विभाग का प्रेजेंटेशन: सचिव कुमार रवि ने बताया कि राज्य में AES प्रबंधन के लिए दवाओं, उपकरणों और डॉक्टरों की उपलब्धता का लगातार गैप असेसमेंट किया जा रहा है।
  2. अस्पतालों की तैयारी:
  • 12 प्रभावित जिलों – मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर – में 15 PICU क्रियाशील।
  • SKMCH मुजफ्फरपुर में 100 बेड का विशेष PICU और 60 बेड का एन्सेफलाइटिस वार्ड तैयार।
  • सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में 10 बेड का वार्ड और सभी PHC स्तर पर बेड आरक्षित।
  1. एम्बुलेंस और दवाएं: मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए 959 एम्बुलेंस तैनात। निजी वाहन से लाने पर ऑन-द-स्पॉट नकद भुगतान। सभी PHC/CHC पर 28 और मेडिकल कॉलेजों में 44 जीवन रक्षक दवाएं 100% उपलब्ध।
  2. जागरूकता अभियान: 1 जून को स्वास्थ्य मंत्री ने जागरूकता रथ रवाना किए। मुजफ्फरपुर में ‘संध्या चौपाल’ के जरिए परिवारों को जागरूक किया जा रहा है।

मुख्य सचिव के सख्त निर्देश :

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मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा, “बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी बच्चा भूखे पेट नहीं सोना चाहिए।” उन्होंने आदेश दिया:

  • सुबह 4 से 6 बजे डॉक्टर अनिवार्य: 80% AES मामले इसी समय आते हैं, इसलिए सभी PHC-अस्पतालों में डॉक्टरों की 100% उपस्थिति जरूरी। ‘दर्पण प्लस ऐप’ और 104 हेल्पलाइन से निगरानी होगी। लापरवाही पर कार्रवाई।
  • आंगनवाड़ी-आशा: कुपोषित बच्चों को NRC भेजें। आंगनवाड़ी पर ORS-पैरासिटामोल रखें। कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त THR।
  • ग्रामीण विकास: जीविका दीदी और मुखिया पंचायत स्तर पर बैठक कर लक्षणों की जानकारी दें।
  • शिक्षा विभाग: ‘सुरक्षित शनिवार’ में ‘चमकी को धमकी’ शामिल करें। मिड-डे मील में प्रोटीन युक्त आहार दें।
  • PHED: महादलित बस्तियों में पानी की जांच, चापाकल मरम्मत और क्लोरिनेशन करें।
  • पशुपालन विभाग: सुअर और जल पक्षियों में वायरल जांच करें। रिहायशी इलाकों से सुअर पालन केंद्र दूर रखें।

सभी डीएम और सिविल सर्जन को अस्पतालों का नियमित निरीक्षण और पंचायत स्तर पर रेफरल ट्रांसपोर्ट टैग करने का आदेश दिया गया है।

पृष्ठभूमि: AES हर साल गर्मी में बिहार के बच्चों को प्रभावित करता है। मुजफ्फरपुर सबसे संवेदनशील जिला है। सरकार इस बार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है।

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