फुलवारीशरीफ, अजित। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, हैदराबाद के साथ अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया. यह संस्थान जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत एक स्वायत्त संस्था है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य पशु विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देना, संकाय एवं छात्र आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना, संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करना तथा नई तकनीकों का विकास करना है, ताकि पशुपालकों और समाज के समग्र विकास में ठोस योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि यह समझौता केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जमीन पर उतारते हुए ठोस परिणाम दिए जाने चाहिए. उन्होंने दोनों संस्थानों से अपेक्षा जताई कि वे इस सहयोग को निरंतर गति दें, जिससे किसानों और पशुधन क्षेत्र को सीधा लाभ मिल सके। वहीं, एनआईएबी के निदेशक डॉ. उल्लास कोलथुर सीताराम ने कहा कि प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान और किसानों की वास्तविक समस्याओं के बीच की दूरी को कम करना जरूरी है. इसके लिए मिशन मोड में कार्य करते हुए विश्वसनीय संस्थानों के साथ सहयोग अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों के लिए एनआईएबी की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं को शोध, निदान एवं नवाचार हेतु उपलब्ध कराने की पेशकश की। उन्होंने आवासीय कार्यक्रम शुरू करने की भी बात कही, जिसके तहत विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी हैदराबाद में रहकर उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे और नए नवाचार विकसित कर सकेंगे. उनका मानना है कि सहयोगात्मक प्रयासों से पशुपालकों की समस्याओं का बेहतर समाधान संभव है।
विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. एन. के. सिंह ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता को नई दिशा देगा. इससे संयुक्त शोध परियोजनाएं, उन्नत निदान सुविधाएं, संकाय आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वैज्ञानिक अनुसंधानों को व्यवहारिक तकनीकों में बदलने में सहायक होगी, जिससे पशुधन उत्पादकता और रोग प्रबंधन में सुधार होगा। एमओयू के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं, अंतर-संस्थागत केंद्रों की स्थापना, कार्यशालाएं एवं सम्मेलन, प्रयोगशाला सुविधाओं का साझा उपयोग तथा बौद्धिक संपदा विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. निर्मल सिंह दहिया, डॉ. ए.के. शर्मा, डॉ. पंकज कुमार सिंह, कर्नल कामेश कुमार, डॉ. ए.के. ठाकुर, डॉ. पंकज कुमार और डॉ. एस.के. गुप्ता शामिल थे।
